सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले निजी स्कूलों में नर्सरी दाखिले के लिए तय नेबरहुड नीति को रद्द किया जाए या नहीं, इस मुद्दे पर हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति ने कहा वे जल्द ही अपना निर्णय देंगे। संभवत: अगले सप्ताह निर्णय आ जाएगा।
न्यायमूर्ति मनमोहन के समक्ष जहां स्कूलों और कुछ अभिभावकों ने सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश को रद्द करने की मांग की, वहीं सरकार और एक गैर सरकारी संगठन ने इन याचिकाओं को खारिज करने का आग्रह किया है।
गैर सरकारी संगठन जस्टिस फॉर आल की ओर से पेश अधिवक्ता खगेश झा ने कहा कि इन स्कूलों में प्रबंधन कोटा समाप्त करने से आम लोगों के 20 फीसदी सीटें अधिक होगी तो इसमें अभिभावकों को क्या परेशानी होगी। प्रबंधन कोटा की 20 फीसदी सीटों पर स्कूल अपनी मर्जी से दाखिला देते हैं।
उन्होंने कहा कि स्कूल अभिभावकों के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। उधर, दिल्ली सरकार ने हाईकोर्ट में साफ कहा कि सरकार से सस्ती दरों पर भूमि लेने वाले स्कूलों को भूमि आवंटन की शर्तों का पालन करना होगा।