राजधानी के लगभग 1700 निजी स्कूलों में नर्सरी दाखिले की रेस 28 नवंबर से शुरू होने जा रही है। इस रेस में स्कूल नॉन स्मोकर, नॉन अल्कोहलिक, शाकाहारी, कामकाजी, स्कूल परिवहन, माता-पिता का रोजगार में होना, पहले आओ पहले पाओ जैसे मानकों को दाखिले का आधार नहीं बना सकते। स्कूलों के 100 अंकों के फॉर्मूले में इस तरह के मानकों को शामिल करने पर रोक रहेगी। यदि स्कूल मनाही के बावजूद ऐसे मानकों को शामिल करते हैं, तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
स्कूलों की ओर से तैयार किए जाने वाले मानक न्याय संगत, भेदभाव सहित व पारदर्शी होने चाहिए। शिक्षा निदेशालय ने नर्सरी, केजी व पहली कक्षा में दाखिले के लिए जारी की गई गाइडलाइंस में स्कूलों को अपने मानक तय करने की छूट दी है। लेकिन, स्कूल इस छूट का लाभ लेते हुए ऐसे मानक शामिल नहीं कर सकते जो कि गैर-जरूरी, भेदभाव बढ़ाने वाले, अस्पष्ट हों। मानकों का पारदर्शी व स्पष्ट होना भी अनिवार्य है। दाखिले का आधार बनाते हुए स्कूल हर साल ऐसे मानक शामिल कर लेते हैं जो कि न्यायोचित नहीं होते इस कारण से कई बच्चे दाखिले से वंचित रह जाते हैं।
दरअसल शिक्षा निदेशालय ने 62 मानकों को शामिल करने पर रोक लगा रखी है। यह ऐसे मानक है जिनके आधार पर स्कूल बच्चों को अंक नहीं दे सकते हैं। कोर्ट ने इन मानकों को प्रतिबंधित कर रखा है। यदि किसी स्कूल की ओर से इन्हें रखा जाता है तो प्रत्येक जिले में स्थापित निगरानी सेल उन पर नजर रख कार्रवाई करेंगे।
स्कूल इन मानकों को शामिल कर नहीं दे सकते अंक
पहला बच्चा, स्थानांतरण केस, अभिभावकों की योग्यता, बच्चे का स्टेटस, संगीत, स्पोर्ट्स में अभिभावकों की राष्ट्रीय उपलब्धि, स्कूल परिवहन, अभिभावकों का उसी स्कूल की दूसरी शाखा में कामकाजी होना, दोनों अभिभावकों का कामकाजी होना, पहले आओ पहले पाओ, साक्षात्कार, मैनेजमेंट कोटा, संयुक्त परिवार, लिंग, भाषा में पारंगत होना, आर्थिक स्थिति, स्कॉलर स्टूडेंट, गोद लिया हुआ बच्चा, जुड़वां बच्चे, दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टॉफ, चचेरा भाई-बहन समेत कुछ अन्य मानक शामिल हैं।