आंदोलन को आम जन का भी समर्थन...
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कृषि कानूनों को रद्द करने और एमएसपी पर गारंटी की मांग को लेकर एकजुट किसानों को शासन-प्रशासन की तमाम बंदिशें भी रोक नहीं पा रही हैं। यूपी गेट पर पिछले 35 दिनों से चल रहे आंदोलन में किसानों की संख्या एक हफ्ते में 30 हजार के पार के आंकड़े पर पहुंच गई हैं। इसका खुलासा यूपी गेट पर पंजीकरण रजिस्टर से हुआ है। किसान यूनियन के पदाधिकारियों को उम्मीद है कि सरकार की देरी के कारण आने वाले दिनों में यह संख्या 50 हजार के आंकड़े को छू लेगी।
यूपी गेट पर पिछले एक हफ्ते से आंदोलन में आने वाले किसानों के नाम, पते, मोबाइल नंबर के साथ आधार कार्ड नंबर या फिर अन्य महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट के नंबर नोट कराकर उनकी उपस्थिति दर्ज कराई जा रही है। यदि कोई किसान गाड़ी या ट्रैक्टर से आंदोलन में पहुंचा है तो उसका भी नंबर रजिस्टर में लिखवाया जा रहा है। पंजीकरण अभियान चलाने वाले हेड तरणजीत सिंह ने बताया कि 25 दिसंबर से उनका अभियान रोजाना सुबह नौ बजे से शाम छह बजे तक चलता है। इस दौरान किसानों के नाम व पते दर्ज कराए जाते हैं।
27 दिसंबर तक रजिस्टर में 10 हजार किसानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, लेकिन इन तीन दिनों में किसानों की संख्या 10 हजार से बढ़कर 30 हजार के पार पहुंच गई है। तरणजीत के मुताबिक, इन रजिस्टरों के आधार पर आंदोलन खत्म होने के बाद किसानों की समस्या को सुलझाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाए जाएंगे। जिन्हें जिले स्तर पर बनाया जाएगा। जबकि राज्य स्तर पर किसान यूनियन के बड़े पदाधिकारियों को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा जाएगा। यदि किसानों को दोबारा किसी भी तरह की दिक्कत होती है तो फिर इप ग्रुपों में मेसेज कर सभी को एकजुट किया जाएगा।
32 साल बाद इतनी तादाद में जुटे किसान
भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि 1988 में वोट क्लब के आंदोलन में काफी बड़ी संख्या में किसान जुटे थे। इसके बाद भी हुए आंदोलनों में किसानों की खासी संख्या जुटती रही लेकिन इस बार जितनी तादाद में किसान यहां जुटे हैं, उससे वोट क्लब की याद ताजा हो गई। उन्होंने कहा कि यह किसानों के लिए खास मौका है जब अलग अलग क्षेत्र के किसान एक दूसरे से यहां मिल पा रहे हैं। यह आंदोलन नहीं होता तो फिर इस तरह से किसानों के आपस में मिलने का मौका कहां मिल पाता। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसान बिरादरी का संगम है जिसका आनंद किसान उठा रहे हैं।
50 हजार के पार पहुंचेगी संख्या
तरणजीत सिंह की मानें तो सरकार यदि किसानों की मांगें मानने में देर करती है तो फिर आगामी दिनों में किसानों की संख्या 50 हजार के पार पहुंच जाएगी। रोजाना किसानों का आना जारी है। पहले ज्यादा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान ज्यादा आते थे, अब तो दूरदराज के राज्यों से भी किसान आ रहे हैं।