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Nuh News: सरकारी व्यवस्था दरकिनार, कमीशन के लिए भूमि पैमाइश में निजी मशीनों का सहारा

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निजी मशीन से पैमाइश कराने पर किसान को देने पड़ते हैं 15-20 हजार
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सरकारी मशीन से लगती है मात्र दो हजार की फीस




रिजवान खान
नूंह। जिले में जमीन की पैमाइश की महंंगी फीस लोगों के पसीने छु़डा रही है। राजस्व विभाग को किसान और आम लोगों की सुविधा के लिए उपलब्ध कराई गई सरकारी रोवर मशीनें लगभग निष्क्रिय पड़ी हैं जिसका फायदा उठाकर निजी रोवर मशीन संचालकों का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। लोगों का आरोप है कि सरकारी मशीनों का उपयोग जानबूझकर नहीं किया जा रहा और कानूनगो लोगों को यह कहकर निजी मशीनों से पैमाइश कराने की सलाह देते हैं कि सरकारी रोवर मशीन चालू नहीं है या मशीन उपलब्ध नहीं है।
आरोप है कि कानूनगो और निजी रोवर मशीन संचालकों के बीच सांठगांठ के चलते लोगों को सरकारी व्यवस्था का लाभ नहीं मिल पा रहा। लोगों का कहना है कि सरकारी मशीन होने के बावजूद उन्हें निजी संचालकों के पास भेज दिया जाता है, जहां पैमाइश के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है, जिसे आम किसान वहन नहीं कर सकते।
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राजस्व विभाग के अधिकारियों के आंकड़ों के मुताबिक पिछले वर्ष राजस्व विभाग को जिले के लिए आठ से दस सरकारी रोवर मशीनें उपलब्ध कराई गई थीं, ताकि जमीन की पैमाइश आधुनिक तकनीक से कम खर्च में हो सके लेकिन इन मशीनों का उपयोग बेहद कम हो रहा है। दूसरी ओर जिले में 25 से अधिक निजी रोवर मशीनें संचालित हो रही हैं और अधिकांश पैमाइश इन्हीं के माध्यम से कराई जा रही है। इनसे पैमाइश कराने पर जहां किसानों की जेब ढीली हो रही है वहीं अधिकारियों को कमीशन मिल रहा है।
किसानों का दावा है कि एक एकड़ जमीन की पैमाइश के लिए 15 से 20 हजार रुपये तक लिए जाते हैं, जबकि सरकारी शुल्क करीब 1500 से 2000 हजार रुपये निर्धारित है। इतना ही नहीं, पैमाइश के बाद नक्शा उपलब्ध कराने के नाम पर भी पांच हजार रुपये तक अलग से वसूले जाते हैं। इससे गरीब किसान और छोटे जमीन मालिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
यदि सरकारी मशीनों का नियमित उपयोग हो तो किसानों के हजारों रुपये बच सकते हैं लेकिन सरकारी व्यवस्था के निष्क्रिय रहने से निजी संचालकों को सीधा फायदा मिल रहा है। किसानों ने मांग की है कि निजी मशीनों पर प्रतिबंध लगाया जाए और पैमाइश रोवर मशीनों से कराई जाए।
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कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन कर सरकारी रोवर मशीन से निर्धारित शुल्क पर अपनी जमीन की पैमाइश करवा सकता है। विभाग को बहुत कम आवेदन प्राप्त होते हैं और जो आवेदन आते हैं, उनकी पैमाइश सरकारी मशीन से कराई जाती है।
- संजीव नागर, पुन्हाना तहसीलदार

सरकारी मशीन होने के बावजूद हमें निजी लोगों के पास भेजा जाता है। गरीब किसान 15-20 हजार रुपये कहां से लाए। प्रशासन को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
- हाजी असगर, टाईं

कानूनगो पहले कहते हैं कि सरकारी मशीन उपलब्ध नहीं है, फिर निजी मशीन वालों का नंबर दे देते हैं। इससे लोगों को मजबूरी में ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं।
- हिदायत खान कमांडो, चंदेनी

सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर मशीनें दी हैं तो उनका इस्तेमाल भी होना चाहिए। यदि सरकारी सुविधा सही मिले तो कोई निजी मशीन के पास नहीं जाएगा।
- वसीम, अधिवक्ता सिंगार

पैमाइश के साथ नक्शे के नाम पर भी हजारों रुपये लिए जाते हैं। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि किसानों का शोषण बंद हो।
- मुबारिक अटेरना, समाजसेवी
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