आने वाले दिनों में देश में जो भी भवन तैयार होंगे उसकी उम्र 50 से बढ़कर 80 या 100 साल होगी। भवनों की आयु सीमा बढ़ाने के लिए आईआईटी रुड़की और नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) मिलकर शोध कर रहे हैं।
ताकि आम आदमी का खर्चा कम होने के साथ-साथ कंकरीट के लिए नदियों पर होने वाले खनन के दोहन को कम करके पर्यावरण को बचाया जा सके। भवनों की उम्र बढ़ाने के अलावा कम दिनों में भवन तैयार करने, ईको बिल्डिंग व मलबे के दोबारा प्रयोग के प्रारंभिक शोध में सफलता मिली है।
इंडिया-इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) के पवेलियन में आईआईटी रुड़की के इंजीनियर भी पहुंचे हुए हैं, जोकि नेशनल ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के मानकों के तहत देश के भवनों के निर्माण के लिए शोध कर रहे हैं।
भवनों की उम्र बढ़ाने के लिए नैनो सीलिका का प्रयोग किया जाएगा। यह केमिकल धान की खेती का वेस्ट होगा। धान के छिलके में केमिकल डालकर नैनो सीलिका तैयार किया जाएगा। शुरुआत में यह थोड़ा महंगा होगा।