आर्थिक संकट से जूझ रही उत्तरी दिल्ली नगर निगम प्रॉपर्टी टैक्स वसूली पर जोर दे रही है। ताकि, निगम के खाली खजाने को भरा जा सके। अब नगर निगम संपत्तियों का डाटा बेस तैयार कर पहचान कोड देगी। इससे सभी लोगों से प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली की जा सकेगी। डाटा बेस तैयार होने के बाद कोई भी प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने से बच नहीं पाएगा।
दरअसल, नगर निगम की आय का मुख्य स्रोत प्र्रॉपर्टी टैक्स है। लेकिन वह वसूली का लक्ष्य प्राप्त नहीं कर पाती है। इसका मुख्य कारण उसके पास संपत्तियों और प्र्रॉपर्टी टैक्स देने वालों का रिकॉर्ड नहीं है। लोग अपनी मर्जी से प्र्रॉपर्टी टैक्स जमा करा रहे हैं।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मुताबिक, उसके इलाके में करीब 12 लाख संपत्ति है, लेकिन उसे मुश्किल से 25 प्रतिशत संपत्तियों का ही प्र्रॉपर्टी टैक्स मिल रहा है। अब निगम सभी संपत्तियों का डाटाबेस तैयार करके पहचान कोड देगी। यह कार्य एक कंपनी करेगी। जिसे पूरा करने का लक्ष्य डेढ़ साल रखा गया है। ब्यौरा एकत्रित होने के बाद निगम को यह पता होगा कि उसे किस संपत्ति का टैक्स नहीं मिल रहा है।
पहले नोटिस, अंतिम में कुर्की
नगर निगम प्र्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में आने वाली संपत्तियों के मालिकों को सबसे पहले नोटिस देगी। प्र्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं कराने पर बैंक खाते सील करा उनसे राशि वसूलने की प्रक्रिया आरंभ की जाएगी। फिर भी वसूली नहीं होने पर संपत्ति कुर्की पर विचार किया जाएगा। दूसरी ओर, नगर निगम माफी योजना लेकर नहीं आने की स्थिति में प्रॉपर्टी टैक्स नहीं देने वालों को बकाया राशि का जुर्माना और ब्याज भी देना पड़ सकता है।