बैंक ने डीएमआरसी के साथ मिलकर जो मेट्रो प्लस कॉर्ड लांच किया है उसमें दो चिप होगी। एक बैंक का अपना व दूसरा मेट्रो स्मार्ट कॉर्ड का चिप होगा। दोनों के बैलेंस खाते बिल्कुल अलग होंगे।
जब आप मेट्रो प्लस कॉर्ड बैंक से लेंगे तो बैंक के खाते में पैसा होगा मगर मेट्रो स्मार्ट कॉर्ड में नहीं होगा। मगर जैसे ही आप मेट्रो के एएफसी (ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन) गेट पर बैंक का एटीएम कॉर्ड लगाएंगे तो आपके बैंक के खाते से 200 रुपये का टॉपअप उसी डेबिट कॉर्ड में लगे मेट्रो स्मार्ट कॉर्ड वाले चिप (मेट्रो स्मार्ट कॉर्ड के खाते) में ट्रांसफर हो जाएगा।
मसलन आपको रिचार्ज कराने के लिए कतार में नहीं लगना होगा। आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा। यानि जैसे ही आपके डेबिट कॉर्ड में लगे मेट्रो चिप के खाते में 100 रुपये से कम बैलेंस होगा तो एएफसी गेट पर कॉर्ड लगाते ही ऑटोमैटिक आपके बैंक के खाते से 200 रुपये का टॉपअप हो जाएगा। अगर बैंक में पैसा नहीं है तो वह टॉपअप नहीं होगा लेकिन मौजूदा बैलेंस में आप सफर जारी रख पाएंगे।
मेट्रो के 70 फीसदी यात्री प्रयोग करते है स्मार्ट कॉर्ड
मेट्रो में रोजाना औसतन 26 लाख से अधिक लोग सफर करते हैं। इसमें 70 फीसदी से अधिक यात्री रोजाना मेट्रो स्मार्ट कॉर्ड का प्रयोग करते हैं। इसके दो फायदे है कि रोजाना टोकन लेने के लिए कतार में नहीं लगता है और 10 फीसदी की छूट मिलती है।
नॉन पीक आवर्स में 10 फीसदी अतिरिक्त छूट भी मिलती है। अब बैंक समझौते के बाद अब इंडसलैंड बैंक के ग्राहक अपने बैंक एटीएम से दूसरे का मेट्रो कॉर्ड भी रिचार्ज कर पाएंगे। बैंक के एटीएम में डेबिट कॉर्ड लगाने पर यह विकल्प मिलेगा। इसके अलाव बैंक के मोबाइल ऐप व इंटरनेट बैंकिंग से भी ऐसा कर पाएंगे।