कहते है अच्छे लोग कभी मरते नहीं है,उनके विचार हमेशा लोगों के लिए प्रेरणा रहती है। पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी उन्हीं में से एक है।
युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत रहे कलाम इंतकाल के बाद अब ज्यादा ढूंढे जा रहे हैं। साइबर सिटी के युवा किताबों में उनके विचार को तलाश रहे हैं। उनके द्वारा लिखी गई किताबों की मांग में अचानक बढ़ोतरी हो गई है।
कलाम की शख्सियत को समझाने के लिए युवा अधिक उत्सुक है। उनके विचारों को जानने के लिए आत्मकथा ‘विंग ऑफ फायर’ की मांग सबसे अधिक है। सदर बाजार और सेक्टर-14 के किताब दुकानों पर कलाम की किताबें गायब नहीं मिल रही है।
शोरूम्स में बढ़ी कलाम की किताबों की मांग
जबकि बुक शोरूम में इसकी मांग लगातार बनी हुई है। सहारा मॉल स्थित बुक शोरूम के मैनेजर प्रदीप सिंगला कहते है महात्मा गांधी की आत्मकथा के बाद कलाम साहब की ऑटोग्राफी की मांग अब तक सबसे ज्यादा मिली है। किताबें हाथों हाथ बिक रही है। किताबें अब स्टॉक में भी नहीं है।
किताब विक्रेताओं की मानें तो ‘विंग ऑफ फायर’ की अंग्रेजी के अलावा दूसरी भाषाओं भी लोग खरीदने आ रहे हैं। आत्मकथा के साथ एक दर्जन टाइटल की मांग बढ़ी है।
स्कूली बच्चों के लिए ‘हम होंगे कामयाब’ की मांग अधिक है। बुक शोरूम में एक दिन में 100 किताबें बिक गई है। आत्मकथा का मलयालम वर्जन ‘अग्नि चिराकुकल’ के ऑर्डर देकर जा रहे हैं।
पुराने स्टॉक की किताबें भी बिक गईं
सदर बाजार स्थित अग्रवाल बुक के संचालकर संदीप अग्रवाल कहते है पहले तो किताबें आती थी, महीनों रखी रहती थी। अचानक मांग आने से सभी पुराने स्टॉक निकल गए है। उपन्यास पढ़ने वाले लोगों में उनके विचारों को अधिक प्राथमिकता मिल रही है।
पुस्तक समीक्षक डॉ. पंकज प्रजापति कहते है आत्मकथा भारतीय युवाओं को मार्गदर्शन प्रदान करने वाले अंदाज में लिखी गई है।
दूसरी किताब ‘गाइडिंग सोल्स-डायलॉग्स ऑफ द पर्पज ऑफ लाइफ’ आत्मिक विचारों को उद्धाटित करती है। अधिकांश किताबें 150-210 पृष्ठ के बीच है। गुड़गांव में अगर किताबों की मांग बढ़ी है तो अच्छे संकेत है।