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वार्ता नाकामः अब आर-पार की होगी लड़ाई, किसान बोले- पीछे नहीं हटेंगे

Sun, 06 Dec 2020 06:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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विज्ञान भवन में किसान प्रतिनिधिमंडल के सदस्य... - फोटो : जी पॉल
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नए कृषि कानूनों को लेकर किसान और केंद्र के बीच बिगड़ी बात शनिवार को पांचवें दौर की बैठक के बाद भी नहीं बनी। बैठक के बाद किसानों ने विज्ञान भवन के बाहर आकर आंदोलन को जारी रखते हुए 8 दिसंबर को भारत बंद का एलान किया। उन्होंने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई होगी। वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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शनिवार दोपहर 2 बजे शुरू हुई बैठक साढ़े 5 घंटे चलने के बाद शाम करीब साढ़े 7 बजे खत्म हुई। बाहर निकले हुए किसान अपने हाथों में हां और ना लिखे हुए पोस्टर को साथ लेकर निकले। नाराज किसानों ने बैठक को विफल बताते हुए 9 दिसंबर को होने वाली बैठक से उम्मीद जताई। विज्ञान भवन के बाहर खड़े किसानों ने एक सुर में कहा कि जब तक सरकार कृषि कानूनों को संशोधन करने के बजाय रद्द नहीं करेगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

बैठक में शामिल किसानों की प्रतिक्रियाएं 

  • हमें उम्मीद है कि 9 तारीख को होने वाला निर्णय किसानों के लिए बेहतर होगा। भारत बंद का नारा कायम रहेगा। -अक्षय, किसान नेता
  • किसान थकने वाले नहीं हैं, 9 दिसंबर को फिर बैठक होगी। 8 दिसंबर को भारत बंद जारी रहेगा। -राकेश टिकैत, राष्ट्रीय प्रवक्ता-भारतीय किसान यूनियन 
  • बैठक में मंत्री कृषि कानूनों में संशोधन के लिए कह रहे थे, लेकिन हम संशोधन के लिए तैयार नहीं थे। हम चाहते हैं कि यह कानून रद्द हों। -किरणजीत सिंह, किसान नेता
  • लोगों के अंदर बहुत गुस्सा है। आज देश का अन्नदाता सड़क पर है। बैठक भी बेनतीजा रही है। -बूटा सिंह, किसान नेता
  • सरकार के अधिकारी पूछ रहे थे कि और किस चीज से परेशानी है। हमने कहा था कि हम पहले ही बता चुके हैं। हमारे हाथ में हां और ना लिखे हुए पोस्टर थे। -अभिमन्यु सिंह, किसान नेता
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बॉर्डर से आई आवाज...

चिल्ला बॉर्डरः भारत बंद के बाद बनाएंगे अगली रणनीति 
शनिवार को सरकार के साथ वार्ता बेनतीजा रहने के बाद चिल्ला बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान मायूस जरूर दिखे। बावजूद, उन्होंने एलान कर दिया कि वह आर-पार की लड़ाई के लिए घर से निकले हैं और सरकार को उनकी बात माननी पड़ेगी। किसानों का कहना है कि वह दिल्ली के बॉर्डरों पर डटे रहेंगे। भारतीय किसान यूनियन (भानु) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष दुष्यंत सिंह ने कहा कि सरकार किसानों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। लेकिन किसान अपनी मांग को लेकर अडिग है। आठ दिसंबर को भारत बंद के बाद अगली रणनीति बनाई जाएगी।

सिंघु बार्डरः आठ दिसंबर को करेंगे भारत बंद
यहां मौजूद कई राज्यों के किसानों को उम्मीद थी कि शनिवार को पांचवें राउंड की बातचीत के बाद शायद कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार कोई फैसला ले लेगी, लेकिन बातचीत बेनतीजा रहने से किसान मायूस हो गए। किसानों का कहना है कि वह कानूनों को वापस लिये बगैर पीछे हटने वाले नहीं हैं। शनिवार को किसानों के साथ हुई बैठक में केंद्र सरकार ने किसानों से नौ दिसंबर को नया प्रस्ताव देने के लिए कहा है। इसके बाद किसान चर्चा करेंगे। किसानों का कहना है कि सरकार की मंशा उन्हें ठीक नहीं लग रही है। सरकार को कानूनों का वापस लेना होता तो शायद अब तक ले चुकी होती। किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं। संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली ने कहा है कि आठ दिसंबर को किसानों की ओर से भारत बंद का आह्वान किया गया है जो जरूर होगा

टिकरी बॉर्डरः हक लेकर ही जाएंगे वापस
टिकरी बॉर्डर पर दोपहर से शाम तक किसान बेहतर परिणाम की उम्मीद लगाए बैठे थे। बातचीत बेनतीजा होने पर किसानों ने कहा कि वह तब तक दिल्ली से वापस नहीं जाएंगे जब तक केंद्र सरकार तीनों काले कानून वापस नहीं कर लेगी। पंजाब किसान यूनियन के नेता गुरप्रीत सिंह ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत से ही हल निकलेगा। सरकार के साथ बातचीत कर रही किसान नेताओं की टीम आगे की रणनीति तैयार करेगी। उसी के अनुसार अगला कदम उठाया जाएगा। लेकिन किसानों के दिल्ली से पीछे वापस लौटने का कोई सवाल ही नहीं उठता। पंजाब किसान संगठन के नचत्तर सिंह ने कहा कि अब तो तीनों काले कानूनों को वापस करा कर ही दिल्ली से वापस आएंगे। किसानों के पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
 
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