चिल्ला बॉर्डरः भारत बंद के बाद बनाएंगे अगली रणनीति
शनिवार को सरकार के साथ वार्ता बेनतीजा रहने के बाद चिल्ला बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसान मायूस जरूर दिखे। बावजूद, उन्होंने एलान कर दिया कि वह आर-पार की लड़ाई के लिए घर से निकले हैं और सरकार को उनकी बात माननी पड़ेगी। किसानों का कहना है कि वह दिल्ली के बॉर्डरों पर डटे रहेंगे। भारतीय किसान यूनियन (भानु) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष दुष्यंत सिंह ने कहा कि सरकार किसानों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। लेकिन किसान अपनी मांग को लेकर अडिग है। आठ दिसंबर को भारत बंद के बाद अगली रणनीति बनाई जाएगी।
सिंघु बार्डरः आठ दिसंबर को करेंगे भारत बंद
यहां मौजूद कई राज्यों के किसानों को उम्मीद थी कि शनिवार को पांचवें राउंड की बातचीत के बाद शायद कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार कोई फैसला ले लेगी, लेकिन बातचीत बेनतीजा रहने से किसान मायूस हो गए। किसानों का कहना है कि वह कानूनों को वापस लिये बगैर पीछे हटने वाले नहीं हैं। शनिवार को किसानों के साथ हुई बैठक में केंद्र सरकार ने किसानों से नौ दिसंबर को नया प्रस्ताव देने के लिए कहा है। इसके बाद किसान चर्चा करेंगे। किसानों का कहना है कि सरकार की मंशा उन्हें ठीक नहीं लग रही है। सरकार को कानूनों का वापस लेना होता तो शायद अब तक ले चुकी होती। किसान पीछे हटने वाले नहीं हैं। संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली ने कहा है कि आठ दिसंबर को किसानों की ओर से भारत बंद का आह्वान किया गया है जो जरूर होगा
टिकरी बॉर्डरः हक लेकर ही जाएंगे वापस
टिकरी बॉर्डर पर दोपहर से शाम तक किसान बेहतर परिणाम की उम्मीद लगाए बैठे थे। बातचीत बेनतीजा होने पर किसानों ने कहा कि वह तब तक दिल्ली से वापस नहीं जाएंगे जब तक केंद्र सरकार तीनों काले कानून वापस नहीं कर लेगी। पंजाब किसान यूनियन के नेता गुरप्रीत सिंह ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत से ही हल निकलेगा। सरकार के साथ बातचीत कर रही किसान नेताओं की टीम आगे की रणनीति तैयार करेगी। उसी के अनुसार अगला कदम उठाया जाएगा। लेकिन किसानों के दिल्ली से पीछे वापस लौटने का कोई सवाल ही नहीं उठता। पंजाब किसान संगठन के नचत्तर सिंह ने कहा कि अब तो तीनों काले कानूनों को वापस करा कर ही दिल्ली से वापस आएंगे। किसानों के पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं उठता।