स्वास्थ्य कर्मचारियों के कोरोना पॉजिटिव मिलने और मरीजों के उपचार से इनकार नहीं करने के आदेशों का विकल्प अब रेफरल सिस्टम बन गया है। इसके बाद मरीजों के रेफर होने का सिलसिला चल पड़ा है। चाहे वह देश का सबसे बड़ा चिकित्सीय संस्थान एम्स हो या दिल्ली सरकार का कोई अस्पताल, हर दिन 60 से 70 मरीज रेफर होकर सफदरजंग अस्पताल पहुंच रहे हैं।
इसका खुलासा सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों के एकजुट होकर प्रबंधन को लिखे शिकायती पत्र से हुआ है। इसमें डॉक्टरों ने लिखा कि एम्स, आरएमएल, लोकनायक, डीडीयू सहित कई अस्पतालों से मरीजों को रेफर किया जा रहा है। सफदरजंग में हर दिन ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सफदरजंग अस्पताल में कोरोना का उपचार भी हो रहा है। साथ ही यहां के स्वास्थ्य कर्मचारी भी संक्रमित हो रहे हैं। ऐसे में अस्पतालों में चला रेफरल का यह खेल तत्काल बंद होना चाहिए।
बहरहाल, इन सब हालात के बीच हकीकत यह है कि दिल्ली में इन दिनों अन्य बीमारियों से ग्रस्त लोगों को उपचार पाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली ईडब्ल्यूएस कमेटी के सदस्य एडवोकेट अशोक अग्रवाल के ही अनुसार, हर दिन उनके पास उपचार न मिलने की शिकायतें आ रही हैं। यह हाल दिल्ली में कोरोना से पहले भी था और अब भी है।
सफदरजंग अस्पताल की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (आरडीए) के अध्यक्ष डॉ. मनीष कुमार का कहना है कि कोरोना से पहले भी रेफरल की वजह से सफदरजंग पर काफी बोझ था। एक बेड पर दो-दो मरीज रखने पड़ रहे थे, लेकिन फिलहाल ऐसी स्थिति नहीं है। कोरोना के चलते एक बेड पर दो मरीज भर्ती नहीं किए जा सकते हैं। दूसरे अस्पतालों को भी सोचना चाहिए कि यहां संसाधानों की सीमा है। एम्स सहित सभी बड़े अस्पतालों से यहां मरीजों को भेजा जा रहा है।
यूपी-हरियाणा बॉर्डर सील, स्वास्थ्य कर्मचारी बेचैन
कोरोना वायरस को लेकर यूपी और हरियाणा के बॉर्डर सील होने से स्वास्थ्य कर्मचारी परेशान हैं। ज्यादातर स्वास्थ्य कर्मचारी हरियाणा और यूपी के पड़ोसी शहरों से दिल्ली आकर स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन सीमाओं पर सख्ती के चलते केवल कोरोना उपचार करने वालों को ही छूट मिल रही है। इसके चलते सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टरों ने प्रशासन को पत्र लिखकर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।