नीट पेपर लीक पर देशभर में युवा आक्रोश के बाद केंद्र सरकार ने आखिरकार बड़ी कार्रवाई की है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के 47 अधिकारियों को शुक्रवार को एकसाथ बर्खास्त कर दिया गया। उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को हटाने के एक दिन बाद यह कदम उठाया गया है। इन अधिकारियों पर जेईई, नीट, सीयूईटी समेत अन्य दाखिला परीक्षाओं को सफलतापूर्वक कराने की जिम्मेदारी थी। इनमें से कई पर कानूनी व आपराधिक मामलों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
एक करोड़ का मुआवजा
केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की शुक्रवार को सीजेपी के प्रतिनिधियों से दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में बैठक हुई। बाद में पार्टी प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा, हमने मंत्रियों से साफ कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर समझौता नहीं हो सकता। पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार ने प्रधान के इस्तीफे की मांग पर जवाब देने के लिए एक दिन का वक्त मांगा है। वहीं, नड्डा ने बताया, हमने उनकी मांगें सुनीं और हम शनिवार को फिर मिलेंगे।
राहुल ने कहा-छात्रों पर पुलिस ने चलाई पैलेट गन
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आरोप लगाया।
देशभर में प्रदर्शन, बंगाल में छात्रों और पुलिस में झड़प के बाद लाठीचार्ज
वांगचुक का अनशन टूटने के बाद भी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का प्रदर्शन जंतर-मंतर पर जारी है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी डटे हैं। सीजेपी के प्रवक्ता दीपक बालयान ने कहा कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के सरकारी वादों को अपर्याप्त बताया।
संसद में 27 को नया विधेयक
केंद्र सरकार अब पेपर लीक मामलों के आरोपियों के लिए सख्त कानून ला रही है। इसमें दस साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, पेपर लीक के सभी मामलों की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई अनिवार्य होगी और कोर्ट को तीन महीने की समय सीमा में फैसला सुनाना पड़ेगा।
कैबिनेट बैठक में जिस विधेयक को मंजूरी दी गई, उसके जरिये सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम मे संशोधन किया जाएगा।
दो साल पहले ही बना था नकल रोधी कानून, एक करोड़ था जुर्माना
केंद्र सरकार ने 2024 में नीट और नेट के पेपर लीक होने पर नया कानून बनाया था। इसमें नकल पर तीन से पांच साल की सजा का प्रावधान था। संगठित नकल पर पांच से 10 साल की जेल और कम से कम एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगता था। इससे पहले इस पर कोई ठोस कानून नहीं था।