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अब हाईकोर्ट पहुंच गया सीबीआई छापेमारी का मामला

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मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के कार्यालय में छापेमारी के दौरान जब्त मूल दस्तावेज दिल्ली सरकार को वापस करने की अपेक्षा केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ट्रॉयल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
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न्यायमूर्ति पीएस तेजी ने फिलहाल सीबीआई के उस तर्क को खारिज कर दिया कि दस्तावेज वापस करने संबंधी ट्रॉयल कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई जाए।

दिल्ली सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने सीबीआई के तर्क पर आपत्ति जताते कहा कि ट्रॉयल कोर्ट ने छापेमारी को लेकर सीबीआई की नीयत पर ही सवाल उठाया है। ट्रॉयल कोर्ट ने विस्तृत जिरह के बाद ही यह फैसला दिया है। ऐसे में सरकार का पक्ष सुने बिना कोई भी आदेश पारित न किया जाए।
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क्यों न सीबीआई के आवेदन को स्वीकार कर लिया जाए

अदालत ने मामले की सुनवाई 25 जनवरी तय करते हुए सरकार व राजेंद्र कुमार को नोटिस जारी कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न सीबीआई के आवेदन को स्वीकार कर लिया जाए।

इससे पूर्व सीबीआई की अधिवक्ता सोनिया माथुर ने कहा कि जांच एजेंसी ने अदालत के आदेश के बाद सरकार को जब्त सभी दस्तावेज की फोटो स्टेट कॉपियां प्रदान कर दी है और ट्रॉयल कोर्ट इस तथ्य को समझने में असफल रही है।

सीबीआई ने मूल दस्तावेज सौंपने के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह आरोपियों के बीच हुई साजिश व गठजोड़ का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य है। मूल दस्तावेज देने से जांच प्रभावित होगी। उन्होंने कहा कि मूल दस्तावेज से ही विशेषज्ञों की राय ली जा सकती है। इसके अलावा मामले में कई गवाहों के बयान दर्ज किए जाने हैं। ऐसे में आदेश को रद्द किया जाए।
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