साइबर सिटी के लोगों को रैपिड मेट्रो फेज-2 के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा। पहले यह सितंबर तक ट्रैक पर उतरना था, लेकिन अब इस वर्ष के अंत तक रैपिड मेट्रो अपनी ट्रैक पर दौडने लगेगी।
रैपिड मेट्रो फेज-2 के ट्रैक पर दौडने से डीएलएफ फेज-1 से सेक्टर-55/56 गोल्फ कोर्स रोड तक जाने वाले लोगों के लिए कनेक्टिविटी का जरिया खुलेगा। वहीं, उम्मीद की जा रही है इस रोड पर रैपिड मेट्रो के चलने से प्रदूषण का स्तर भी कम होगा।
दरअसल, देश की पहली प्राइवेट मेट्रो के दूसरे फेज का काम अप्रैल 2013 में शुरू हुआ था। 2143 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही 07 किलोमीटर लंबे रूट का पहले वर्ष 2016 के छमाही में तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था।
इसे फिर बढ़ाकर सितंबर किया गया, लेकिन अब यह भी डेड लाइन पीछे हो गईल् है। रैपिड मेट्रो प्रबंधन की ओर से अब इस वर्ष के अंत तक इसे पूरा करने का दावा किया जा रहा है।
हालांकि जानकारों की मानें तो इस वर्ष के अंत तक काम होना मुश्किल है। यह डेडलाइन भी आगे बढने की संभावना जताई जा रही है।
पहले फेज के छह स्टेशनों के बीच अभी मेट्रो दौड़ रही है। इसकी बढ़ते यात्रियों की संख्या को ध्यान में देखते हुए फेज-2 में विस्तार का निर्णय लिया गया था, लेकिन रैपिड मेट्रो फेज-2 के विस्तार में कई परेशानियों का सामना करना पड़ा था।
रैपिड मेट्रो के साथ उस सड़क की चौड़ीकरण, बीपीसीएल गैस लाइन की शिफ्टिंग और जेनपेक्ट के पास अंडरपास के निर्माण से काफी काम प्रभावित हुआ था। इसके बाद से अब लगातार तेजी से काम किया जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक 80 फीसदी से अधिक काम पूरा हो गया है। करीब 20 फीसदी कुछ महीनों में पूरा हो जाएगा। बुनियादी तौर पर ढांचा खड़ा करने का काम पूरा होने के बाद सेफ्टी और क्वालिटी टेस्ट किया जाएगा।
इसमें इन-हाउस और सरकार द्वारा इसमें पास होने के बाद ही इसे यात्रियों के लिए शुरू किया जाएगा। हालांकि सूत्रों की मानें तो मेट्रो रेल सेफ्टी के आयुक्त द्वारा जांच और फिर उसके बाद एनओसी लेने में भी कई महीने लगेंगे।
जिसकी वजह से थोड़ी विलंब होगी। पहले फेज में भी इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ा था, जिसकी वजह से करीब 10 महीने की देरी हुई थी। फिर जनवरी 2013 में यह देरी से शुरू हुआ था।