जिला परिषद का परिणाम आने के साथ ही चेयरमैन पद के लिए सियासी दांव शुरू हो गए हैं। अध्यक्ष पद पर अपनी पार्टी का प्रतिनिधि बिठाने को सत्तापक्ष व विपक्ष जोड़तोड़ की गणित लगाने में जुट गए हैं।
करीब आधा दर्जन से अधिक निर्दलीय जिला परिषद सदस्यों पर दांव खेल कर दोनों ही दल अपनी अपनी ताकत दिखाने को जोर लगा रहे हैं।
प्रदेश में भाजपा सरकार के होने के कारण सत्तापक्ष जल्द से जल्द शपथ ग्रहण समारोह कराने की तैयारी में है। जबकि कांग्रेस हालात को भांपकर अपने साथ दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा लेकर चंडीगढ़ पहुंचने को कदमताल शुरू हो गया है।
15 सदस्यों वाली जिला परिषद में दो तिहाई बहुमत के लिए करीब 10 सदस्य की आवश्यकता है। जीत से पहले ही पार्टियां अपने-अपने जमीन टटोलने के साथ उम्मीदवारों के जीत को भांपते हुए नजदीकियां बनानी शुरू कर दी थीं।
कांग्रेस और भाजपा की ओर से अभी तक अध्यक्ष पद के लिए नाम घोषित नहीं किया गया। अध्यक्ष पद के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों के पास बहुमत नहीं है। इसलिए दोनों दल अप्रत्यक्ष रूप से गेम बनाने में जुटे हैं।
भाजपा और कांग्रेस की ओर से अध्यक्ष बनाने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि 15 जिला पार्षद में सात भाजपा समर्थित हैं, जबकि इनमें छह आजाद उम्मीदवारों ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। आजाद प्रत्याशियों का दावा है कि उन्होंने अपने दम पर चुनाव जीता है।
अब देखना यह होगा कि इस खेल में आजाद जीत कर आए पार्षदों को सत्ताधारी भाजपा अपनी ओर खींचने में सफल हो पाती है या पूर्व की तरह कांग्रेस ही अपने मोहरों को फिट करके सत्ताधारी दल को सियासी मात देने में सफल हो पाती है।
दोनों ही दलों ने सदस्यों को एक स्थान पर इकट्ठा करने की पुरानी नीति को बदल कर संबंधित क्षेत्र के नेताओं की जिम्मा फिक्स कर दिया है, जिससे संबंधित क्षेत्र के नेता का कद भी पार्टी में मापा जाएगा।