नोएडा निवासी श्वेता ने ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक बिल्डर के प्रोजेक्ट में फ्लैट बुक कराया। बिल्डर ने साढ़े तीन साल में बनाकर देने के वादा किया।
बाद में बिल्डर ने उस पर प्राधिकरण से एफएआर और परचेज कर लिया, जिससे उसे 24 मंजिल बनाने की अनुमति मिल गई, लेकिन साढ़े तीन साल में पूरा होने वाला प्रोजेक्ट पांच साल बाद भी अधूरा है। श्वेता अपने घर का पजेशन पाने को इंतजार कर रही हैं।
यह असलियत किसी एक बिल्डर की नहीं है, बल्कि नोएडा व ग्रेटर नोएडा के तमाम बिल्डर प्राधिकरणों के साथ मिलकर यह गड़बड़ी कर लेते हैं। दोनों प्राधिकरणों में एफएआर परचेज करने का प्रावधान है, जिसका बिल्डर फायदा उठा रहे हैं।
यीडा में एफएआर (फ्लोर एरिया रेश्यो) परचेज करने का प्रावधान नहीं है। आवंटन के समय प्लॉट पर जितना एफएआर मिला है उसी का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन नोएडा-ग्रेनो में बिल्डर प्राधिकरणों से निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के लिए भी एफएआर परचेज कर लेते हैं, जबकि नए प्रोजेक्ट पर ही परचेजबल एफएआर का प्रावधान है।
पजेशन में देरी के साथ ही सुविधाओं में कटौती कर देते हैं। 14 मंजिल तक के फ्लैट निवासियों के हिसाब से सुविधाएं विकसित की जाती हैं। एफएआर बढ़ाने से 24 मंजिल तक बनने वाले फ्लैट खरीदार उतनी सुविधाएं उपयोग करते हैं।