दिल्ली को पांच जोन में बांटा
योजना के तहत दिल्ली को पांच जोन में बांटा गया है। करीब 109 सेक्टर इन पांचों जोन में तैयार किए जाएंगे। पश्चिम दिल्ली को एल, दक्षिण-पश्चिम दिल्ली को के, दक्षिण दिल्ली को जे, उत्तरी-पश्चिम दिल्ली को एन, उत्तरी दिल्ली को पी 1 और पी 2 जोन में बांटा है। सभी जोन के लिए अलग-अलग विकास की श्रेणी भी रखी है।
इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि उत्तरी-पश्चिमी दिल्ली यानि एन जोन की कुल जमीन का 48 फीसदी हिस्सा आवासीय सुविधाओं के लिए रखा है। जबकि 18 फीसदी जमीन मनोरंजन और 10 फीसदी ऑफिस के लिए रखी गई है। इस योजना के तहत डीडीए को केवल बुनियादी सुविधाओं का अधिकार दिया है। जमीन अधिग्रहण से लेकर घरों के निर्माण तक का कार्य पीपीपी के तहत होगा।
2030 तक दिल्ली का नया रूप देखने को मिलेगा: पुरी
केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का कहना है कि साल 2030 तक दिल्ली का नया रूप देखने को मिलेगा। जहां अवैध कॉलोनियों के झंझट से लोगों को राहत मिलेगी। वहीं दिल्ली में लोगों को अपने घर के नजदीक ही लगभग सभी सुविधाएं मुहैया होंगी।
परिवहन से लेकर शॉपिंग मॉल तक उनके घर के नजदीक ही मिलेंगे। वहीं डीडीए के वाइस चेयरमैन तरुण कपूर ने कहा कि लैंड पूलिंग पॉलिसी के लिए किसानों की भूमिका सबसे बड़ी है, चूंकि ज्यादातर किसानों को इंटरनेट की जानकारी नहीं है।
क्या है लैंड पूलिंग पॉलिसी
जिन लोगों के पास दो हैक्टेयर से ज्यादा अपनी जमीन है या ऐसे लोगों का समूह डीडीए से मिलकर लैंड पूलिंग स्कीम के तहत रजिस्टर्ड हो सकते हैं और उन जमीन पर फ्लैट्स बनाकर बेच सकते हैं। सेक्टर के लिए 70 फीसदी जमीन एकसाथ होना जरूरी है। सेक्टर के लिए 250 से 400 हेक्टेयर जमीन का होना जरूरी है।