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अब घर बनाने की मंजूरी प्रक्रिया ऑनलाइन: डीडीए ने शुरू किया सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम, पारदर्शिता का दावा

Wed, 13 May 2026 02:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली

सार

नई व्यवस्था लागू होने के बाद भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूरी की जा सकेगी। डीडीए का दावा है कि इससे न केवल मंजूरी प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
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डीडीए - फोटो : ANI
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विस्तार
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राजधानी में मकान बनाने या भवन निर्माण की मंजूरी लेने के लिए अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। डीडीए ने ऑनलाइन बिल्डिंग परमिट सिस्टम (ओबीपीएस) के तहत सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम शुरू कर दिया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पूरी की जा सकेगी। डीडीए का दावा है कि इससे न केवल मंजूरी प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।

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डीडीए ने यह प्रणाली ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग के तहत तैयार की है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भवन स्वीकृति प्रक्रिया में हो रही देरी, भ्रष्टाचार और लोगों की परेशानियों को देखते हुए इस प्रणाली को जल्द लागू करने के निर्देश दिए थे। अधिकारियों के अनुसार उपराज्यपाल कार्यालय इस नई व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा भी करेगा।

अब तक भवन निर्माण की अनुमति लेने के लिए लोगों को कई विभागों के बीच समन्वय करना पड़ता था। भवन नक्शा पास कराने से लेकर अग्निशमन, जल, सीवर और अन्य विभागों की एनओसी के लिए अलग-अलग कार्यालयों में जाना पड़ता था। कई मामलों में फाइलें महीनों तक लंबित रहती थीं। नई प्रणाली के तहत अब मकान मालिक, बिल्डर, आर्किटेक्ट और डेवलपर्स एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भवन नक्शा, दस्तावेज और विभिन्न एनओसी के लिए आवेदन कर सकेंगे।
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डीडीए अधिकारियों के मुताबिक यह केवल ऑनलाइन सुविधा नहीं, बल्कि शहरी प्रशासन को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा सुधार है। यह प्रणाली भविष्य में दिल्ली की अन्य नागरिक सेवाओं के लिए भी मॉडल साबित हो सकती है।

घर बैठे आवेदन जमा कर सकेंगे
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। आवेदक घर बैठे आवेदन जमा कर सकेंगे, ऑनलाइन शुल्क का भुगतान कर सकेंगे और आवेदन की स्थिति को रियल टाइम में ट्रैक भी कर सकेंगे। मंजूरी मिलने के बाद डिजिटल हस्ताक्षर वाले अप्रूवल लेटर भी ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। इससे लोगों को बार-बार डीडीए कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

सिस्टम में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया
डीडीए ने इस सिस्टम में आधुनिक तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित प्लान स्क्रूटनी, ऑटोमेटेड कंप्लायंस चेक और जियो टैग्ड मोबाइल निरीक्षण जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। यानी भवन निर्माण के नक्शों और नियमों की जांच अब तकनीकी स्तर पर भी होगी। इससे फाइलों की जांच पहले की तुलना में अधिक तेज और सटीक तरीके से की जा सकेगी। अधिकारियों का कहना है कि एआई आधारित जांच व्यवस्था से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, जिससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की शिकायतों में भी कमी आने की उम्मीद है। इसके अलावा एसएमएस और ईमेल अलर्ट सिस्टम के जरिए आवेदकों को हर चरण की जानकारी मिलती रहेगी। आवेदन स्वीकार होने, निरीक्षण, आपत्तियों और मंजूरी जैसी सभी जानकारियां सीधे मोबाइल और ईमेल पर भेजी जाएंगी।

रियल एस्टेट और शहरी विकास क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम
दिल्ली जैसे बड़े महानगर में यह कदम रियल एस्टेट और शहरी विकास क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। लंबे समय से बिल्डिंग परमिट सिस्टम को जटिल, धीमा और भ्रष्टाचार प्रभावित माना जाता रहा है। कई लोग मंजूरी प्रक्रिया में देरी के कारण अतिरिक्त आर्थिक बोझ झेलते थे। नई व्यवस्था से समय और लागत दोनों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

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