किसानों से आवासीय प्लॉट खरीदना 1 अगस्त से महंगा हो जाएगा। रजिस्ट्री विभाग ऐसे प्लॉटों का सर्किल रेट बढ़ाने जा रहा है। जमीन अधिग्रहीत करने पर प्राधिकरण किसानों को विकसित सेक्टरों में सात फीसदी आवासीय भूखंड देता है।
इसके बदले प्राधिकरण किसानों से सिर्फ विकास शुल्क ही लेता है, जो मुआवजे का करीब 10 फीसदी होता है। ग्रेटर नोएडा में किसानों को दी जाने वाली मुआवजा राशि करीब 1400 रुपये प्रति वर्ग मीटर है।
जरूरत न होने पर किसान इस प्लॉट को बेच देते हैं। इन प्लॉटों का मौजूदा सर्किल रेट 15,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक है। किसानों से जमीन खरीदने पर इसी दर पर रजिस्ट्री होती है।
स्टांप शुल्क देना होता है। 1 अगस्त से सर्किल रेट रिवाइज होने जा रहा है। ऐसे प्लॉटों को रेट बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। मौजूदा सर्किल रेट में 10 से 15 फीसदी की वृद्धि की जा सकती है।
रजिस्ट्री विभाग का मानना है कि ग्रेटर नोएडा में ऐसे प्लॉट 25 से 30 हजार रुपये में बिक रहे हैं। वहीं, इंडस्ट्री और व्यावसायिक संपत्तियों की दरों में कोई खास इजाफा होने के आसार नहीं है। फ्लैटों की दरें भी पूर्ववत रखने पर विचार किया जा रहा है।
आवासीय भूखंड व संस्थागत की दरें भी बढ़ सकती हैं। रजिस्ट्री विभाग के कर्मचारी बाजार दरों का सर्वे कर रहे हैं। 5 जुलाई तक इसका खाका तैयार हो जाएगा। इसके बाद आपत्तियां मांगी जाएंगी। उनका निस्तारण कर लागू किया जाएगा।
आयकर से बढ़ेगी मुश्किल
जानकार मानते हैं कि आयकर विभाग जमीन की खरीद-बिक्री के लिए सर्किल रेट को ही आधार मानता है। अगर किसान किसी से प्लॉट खरीदता है या किसी को बेचता है तो उसे सर्किल रेट के हिसाब से लेन-देन दिखाना होगा।
सर्किल रेट से अधिक रकम काले धन में चली जाती है। किसानों का कहना है कि कई जगह सर्किल रेट बाजार रेट से भी ज्यादा है। अगर लेन-देन सर्किल रेट से कम दिखाया जाता है तो आयकर विभाग से नोटिस भी आ जाता है। वर्तमान समय में ऐसे कई किसानों को नोटिस मिल चुके हैं।