राजधानी में अब डॉगी का भी अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। देश में अपनी तरह का पहला पहला शवदाह गृह द्वारका सेक्टर 29 में तैयार करने की योजना है। यहां अंतिम संस्कार की क्रिया पूरा कराने के लिए पंडित की तैनाती होगी। वहीं, अगले दिन सुबह लोग अपने पशु के फूल भी चुग सकेंगे।
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम ने इस बारे में योजना तैयार की है। इसे अब निगम आयुक्त की मंजूरी का इंतजार है। आयुक्त से हरी झंडी मिलते ही जमीनी स्तर पर काम शुरू होगा। इसके एक महीने के अंदर इसे चालू भी कर दिया जाएगा।
वर्तमान में राजधानी में कहीं भी कुतों के कब्रिस्तान या फिर शवदाहगृह के लिए जगह नहीं है। यही वजह है कि कुतों की मौत हो जाने पर पशु प्रेमियों को उन्हें दफनाने के लिए जगह का चुनाव करना पड़ता है। दिल्ली जैसे शहर में इस तरह की जगह मिलना आसान नहीं रहता। इस समस्या को देखते हुए निगम प्रशासन ने यह योजना तैयार की है।
नेता सदन नरेंद्र चावला ने बताया कि बड़ी संख्या में पशु प्रेमियों ने कुता पाल रखा है। कोई उपयुक्त इंतजाम न होने से कुतों की मौत होने पर लोग मजबूरन अपने पालतू कुतों को खुली जगह में दफना देते हैं। चावला के मुताबिक, कई लोगों की अपने पालतू कुतों से अधिक लगाव होता है। यही वजह है कि कुछ लोग कुतों को अपने परिवार का सदस्य मानते हुए उनकी मौत पर शौक भी जताते हैं।
चावला ने बताया कि इन सब वजहों से निगम ने शवदाह गृह बनाने की योजना तैयार की है। इसके लिए द्वारका सेक्टर 29 में जगह की पहचान भी कर ली गई है। यहां अभी कुतों के बंध्याकरण होता है। योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए इसका आधा हिस्सा शवदाह गृह के प्रयोग में लाया जाएगा।
पंडित की भी रहेगी व्यवस्था
कुतों के शवदाहगृह में अंतिम संस्कार की क्रिया को पूरा कराने के लिए पंडित की भी व्यवस्था रहेगी। ऐसे में पंडित पूरे रीति रिवाज के साथ कुते के शव का अंतिम संस्कार करेगा। वहीं, चिता के अगले दिन सुबह लोग अपने पशु के फूल चुगने के लिए भी जा सकेंगे।
शुरुआत में चार भट्टियों की रहेगी व्यवस्था
शवदाहगृह में शुरुआती तौर पर चार भट्टियों की व्यवस्था की जाएगी। बताया जा रहा है कि इन्हें डीजल के माध्यम से चलाया जाएगा। वहीं, लकड़ी की भी व्यवस्था रहेगी। शुरुआत में चार भट्टियां रखने के बाद भविष्य में इनकी संख्या को भी बढ़ाए जाने पर विचार किया जाएगा।
अंतिम संस्कार के लिए लगेगा मामूली शुल्क
कुतों के अंतिम संस्कार के लिए निगम द्वारा मामूली शुल्क लिया जाएगा। हालांकि, अभी इस संबंध में शुल्क की राशि तय नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि अंतिम संस्कार के लिए लोगों की जेब पर अधिक बोझ न पड़े इसको देखते हुए शुल्क को कम से कम निर्धारित किया जाएगा। वहीं, शवदाहगृह में शुल्क अदा करने के बाद निगम द्वारा रसीद भी दी जाएगी।
आवारा कुतों का भी किया जा सकेगा अंतिम संस्कार
शवदाह गृह में पालतू पशुओं के साथ-साथ आवारा कुतों का भी अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। इस संबंध में नेता सदन नरेंद्र चावला ने कहा कि कई बार देखने में आता है कि आवारा कुते कई बार दुर्घटना के कारण सड़क किनारे मृत पाए जाते हैं। ऐसे में यदि कोई समाज सेवी संस्था या कोई पशु प्रेमी उन्हें शवदाह के लिए लाएगा तो उनका भी अंतिम संस्कार किया जाएगा।