ट्यूबवेल से भूजल निकाल कर उसे आरओ से ट्रीट किया जाएगा, जिसे यूजीआर में इकट्ठा किया जाएगा और इस पानी को पीने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा दिल्ली सरकार 380 छोटी वाटर बॉडीज को ठीक करने की दिशा में कार्य शुरू किया और वह 35 छोटी वाटर बॉडीज सही कर चुकी है।
ट्रीटमेंट प्लांटों में बनाई जा रही कृत्रिम झीलें
दिल्ली जल बोर्ड द्वारका वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, तिमारपुर ऑक्सिडेशन तालाब, रोहिणी वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट, निलोठी वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और पप्पन कलां वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में कृत्रिम लील बना रहा है। द्वारका, रोहिणी, निलौठी और पप्पन कलां झीलों को ट्रीटेड पानी से पुनर्जीवित किया गया है और इनमें 41 एमजीडी ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल किया गया है। तिमारपुर तालाब रॉ सीवेज को ट्रीट कर बनाया गया है. इसमें छह एमजीडी रॉ सीवेज को ट्रीट किया जा रहा है।
डंपिंग साइट पर बनी झील को किया विकसित
बुराड़ी के सत्य विहार स्थित झील पुनर्जीवित होने वाली झीलों में प्रमुख है। इस झील का क्षेत्रफल 13371 वर्ग मीटर है। जहां पहले आसपास के लोग इस झील को ठोस कचरा डंपिंग साइट के रूप में इस्तेमाल करने लगे थे और आसपास की निकासी का गंदा पानी झील में गिर रहा था। इस झील में कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड बनाए गए हैं। इनके माध्यम से रॉ सीवेज, एक स्क्रीन चैंबर से होते हुए सैटलिंग टैंक में जाता है। इसके बाद कंक्रीट की लेयर्स पर लगे पौंधों से गुजरते और फिल्टर होते हुए आगे बढ़ता है और ट्रीटेड वाटर टैंकर में एकत्रित होता है और इस पानी को आखिर में झील में डाला जाता है।