नई दिल्ली में घरों के बाद अब सड़कों पर भी मुफ्त पानी पिलाने को सरकार तैयार है। घर से निकलने पर आपको साफ-सुथरे ठंडे पानी की फिक्र नहीं करनी होगी।
बोतलबंद पानी पर होने वाला खर्च बचेगा और रेहड़ी का दूषित पानी सेहत पर भी भारी नहीं पड़ेगा। दिल्ली सरकार राजधानी के सभी बस स्टॉप पर आधुनिक प्याऊ लगाने की योजना पर काम कर रही है।
पायलेट प्रोजेक्ट एक महीने के भीतर शुरू हो जाएगा। इसके तहत सरकार आउटर व इनर रिंग रोड पर मुफ्त में पानी पिलाएगी। वहीं, एक साल के भीतर पूरी दिल्ली को कवर कर लिया जाएगा।
कुछ ऐसी होगी व्यवस्था
दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, तपती गर्मी में घर से बाहर निकलते ही ठंडे पानी की जरूरत होती है। अमूमन बेहतर गुणवत्ता का ठंडा पेयजल मिलना मुश्किल होता है।
इसके लिए या तो बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है या फिर हर बस स्टॉप के किनारे लगी रेहड़ियां प्यास बुझाती है। आम लोगों की सहूलियत के लिए योजना तैयार की गई है कि राजधानी के सभी बस स्टॉप पर आधुनिक प्याऊ लगाया जाए।
इससे शोधित व ठंडा पानी मिलेगा। इसके लिए उन्हें कोई शुल्क भी नहीं देना होगा। इंतजाम करने की पूरी जिम्मेदारी दिल्ली जल बोर्ड को दी गई है। जल बोर्ड एक महीने के भीतर आउटर व इनर रिंग रोड पर प्रोजेक्ट चालू भी कर देगा।
50 लाख मुसाफिरों को होगा फायदा
जल बोर्ड के उपाध्यक्ष कपिल मिश्रा ने इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि योजना पर तेजी से काम हो रहा है। डिजाइन व लागत का आकलन हो गया है। मशीन लगाने के साथ इसके संचालन में जल बोर्ड पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा। विज्ञापन की सुविधा से आर्थिक दिक्कत भी नहीं होगी।
दिल्ली सरकार की इस योजना का सीधा फायदा डीटीसी से रोजाना सफर करने वाले करीब 50 लाख मुसाफिरों को मिलेगा। बस स्टॉप के नजदीक प्याऊ लगने से गर्मी में पानी की किल्लत नहीं होगी। करीब चार हजार बस स्टॉफ पर प्याऊ लगाने की योजना है।
एक महीने में इसकी शुरुआत दोनों रोड से होगी। इसके बाद करीब 2500 बस क्यू शेल्टर पर इसे लगाया जाएगा। आखिर में करीब पांच हजार बस स्टैंड इसके दायरे में होंगे। एक साल के भीतर योजना पूरी कर ली जाएगी।
टैंकर से भी कमाई करेगी सरकार
दिल्ली सरकार जल बोर्ड के टैंकर से भी कमाई करने की योजना पर काम कर रही है। टैंकर पर विज्ञापन लगवाने की तैयारी की जा रही है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआती आकलन के मुताबिक, इससे होने वाली कमाई से न सिर्फ टैंकर खरीदने की लागत शून्य हो जाएगी, बल्कि टैंकर की परिचालन लागत भी इससे निकल आएगी।
इसके लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिया गया है। एक महीने के भीतर रिपोर्ट तैयार कर लेनी है। वहीं, पायलेट प्रोजेक्ट के तहत एक महीने में कुछ टैंकर पर विज्ञापन लगा भी दिए जाएंगे।
जल बोर्ड का जोर निजी विज्ञापनों पर ज्यादा होगा। वरिष्ठ अधिकारी की माने तो करीब 250 टैंकर खरीदने पर 70 करोड़ रुपये तक का खर्च आ रहा है। परिचालन लागत इससे अलग है। जल बोर्ड के सभी 800 टैंकरों पर विज्ञापन लगाने से टैंकर व परिचालन लागत शून्य हो जाएगी।