राठौड़ ने कहा कि कोरोना वायरस स्पाइक (एस), इनवैलप (ई), मैम्ब्रेंस (एम) और न्यूक्लिओकेप्सिड (एन) समेत कई तरह के प्रोटीन से बना होता है। इस जांच में हम माइक्रोप्लेट आधारित एंजाइम प्रतिरक्षा जांच तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। जांच किट की अनुमानित कीमत पर उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा कि मौजूदा जांच की तुलना में इसकी लागत कम होगी। एक महीने में हमें ठोस परिणाम मिलेंगे और उसके बाद हम आकलन कर पाएंगे।
किट के अगले महीने बाजार में उपलब्ध होने की उम्मीद
आईआईटी दिल्ली देश में पहला ऐसा शैक्षणिक संस्थान है जिसे कोविड-19 जांच किट के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (आईसीएमआर) से अनुमति मिली है। संस्थान ने कमर्शियल जांच के लिए बंगलूरू स्थित बायोटेक्नोलॉजी कंपनी जिनी लैबोरेटीज को नॉन-एक्सक्लूजिव ओपन लाइसेंस दिया है लेकिन प्रति किट की कीमत 500 रुपये रखी है। किट का निर्माण विशाखापट्टनम में आंध्र प्रदेश मेड टेक जोन (एएमटीजेड) में किया जा रहा है और अगले महीने बाजार में इसके उपलब्ध होने की उम्मीद है।
जांच की कीमत में आएगी कमी
टीम के अनुसार, मौजूदा जांच प्रणाली ‘जांच आधारित’ है जब आईआईटी टीम तैयार विकसित किट ‘जांच-फ्री’ प्रणाली है जिससे जांच की सटीकता से समझौता किए बिना इसकी कीमत कम होगी। तुलनात्मक कड़ियों के विश्लेषण का इस्तेमाल करते हुए आईआईटी दिल्ली की टीम ने कोविड-19 और सार्स सीओवी-दो जीनोम में खास स्थानों (आरएनए की छोटी कड़ी) की पहचान की है।