शुक्रवार को सीबीआई को एक विशेष फोरेंसिक लैब का तोहफा मिला है। इसकी बदौलत सीबीआई की टीम अब जांच प्रक्रिया में एप्पल के डिवाइसेज को भी डिकोड कर सकेगी।
नई लैब का उद्घाटन सीबीआई एकेडमी गाजियाबाद में किया गया। सीबीआई सूत्रों की माने तो ये लैब अत्याधुनिक तकनीकी यंत्रों से लैस है। जिसके सॉफ्टवेयर और वर्क-स्टेशन बेहतर तकनीक के साथ एप्पल डिवाइसेज के डिजिटल कंटेंट को आसानी से डिकोड कर सकते हैं।
सीबीआई अबतक एप्पल और लाइनैक्स आधारित कंटेट कोड-डिकोड करने के मामले में ज्यादा सक्षम नहीं थी। जोकि अब फोरेंसिक विशेषज्ञों की देखरेख और विन्डोज आधारित सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग से मजबूत हो रही है।
किस तकनीक को क्रैक करेगी लैब ?
नई लैब एप्पल तकनीक जैसे आई-मैक, मैक बुक प्रो, आई पैड, आई फोन, आई पोड, और साथ ही साथ एन्ड्रॉयड आधारित लाइनेक्स डिवाइस को क्रैक करने पर फोकस है।
इसके जरिये क्लॉनिंग, इमेजिंग, फोरेंसिक विश्लेषण और पासवर्ड रिक्वरी आसानी से हो सकेगी। सीबीआई डायरेक्टर अनिल सिन्हा ने उद्घाटन के बाद नव नियुक्त सब-इंस्पेक्टर का एजेंसी की ट्रेनिंग एकेडमी में परिचय भी कराया।
बतौर सिन्हा वे जांच टीम में उन विशेषज्ञों को चाहते हैं जो ना केवल भ्रष्टाचार निरोधक अपराध में बल्कि पारंपरिक, व्यापारिक अपराधों के अलावा बैंक फर्जीवाड़े और हाईटैक साइबर अपराधों पर भी मजबूत पकड़ बनाने में सक्षम हों।
अनिल सिन्हा के मुताबिक ये अकादमी बुनियादी कौशल के लिए बनी है लेकिन अब दारोमदार नये लोगों पर है। ऐसे में देखना है कि वे कैसे इसे आग ले जाकर सुधार करते हैं।