राजधानी दिल्ली में कहर बरपा रहे चिकनगुनिया और डेंगू को लेकर गुड़गांव के लोगों में भी भय का माहौल है। यहां बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
सरकारी और निजी अस्पतालों में रोजाना पांच से साढे़ पांच हजार मरीज इसके आ रहे हैं। दिल्ली के हालात को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग के भी हाथ-पांव फूलने लगे हैं।
गुड़गांव की नई सीएमओ डॉ. पुष्पा विश्नोई ने कहा कि यहां डेंगू, चिकनगुनिया और मलेरिया नियंत्रण में हैं। विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। स्थिति जल्द ही बेहतर होने लगेगी।
सीएमओ ने बताया कि लगातार ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि निजी अस्पताल अपने फायदे के लिए लोगों में चिकनगुनिया और डेंगू के नाम पर दहशत फैला रहे हैं।
सभी निजी अस्पतालों को शुक्रवार को नोटिस जारी किया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में बृहस्पतिवार को बुखार पीड़ितों की काफी भीड़ रही।
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार जिले में अभी डेंगू के 41 और चिकनगुनिया के दो कंफर्म मामले हैं। डेंगू के 41 मामलों से 12 को बाहरी बताया जा रहा है। हालांकि डेंगू संभावितों की संख्या ढाई सौ के पार पहुंच गई है।
दिल्ली में चिकनगुनिया से मरने वालों की संख्या 10 होने के बाद स्वास्थ्य विभाग मैन पावर बढ़ाने जा रहा है। डेंगू नियंत्रण के काम को और मजबूती के साथ करने के लिए छह गाड़ियां और करीब 20 अतिरिक्त कर्मचारियों को लगाया जाएगा।
फिलहाल शहर में अभी 20 ब्रीडिंग चेकर काम कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वह अपने घरों के आसपास पानी एकत्र नहीं होने दे।
फॉगिंग के लिए यहां करें संपर्क
नगर निगम व जिला प्रशासन द्वारा नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वह अपने घरों व आसपास के क्षेत्र में पानी जमा नहीं होने दें।
फॉगिंग कराने के लिए नगर निगम के टोल फ्री नंबर 1800. 180. 1817 पर संपर्क किया जा सकता है। नगर निगम के वरिष्ठ सफाई निरीक्षण अंबिका शर्मा ने बताया कि रोजाना 20 से 30 स्थानों पर फॉगिंग कराई जा रही है। लोगों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है।
डेंग के लक्षण
-अचानक तेज बुखार का आना
-सिर के अगले भाग में दर्द
-आंख के पिछले भाग में दर्द
-मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द
-भूख व मुख के स्वाद का कम होना
-खसरा जैसे दाने छाती और हाथ के ऊपरी भाग पर निकलना
-मिचली व उल्टी का आना
क्या करें, क्या ना करें
-सप्ताह में कम से कम एक बार कूलर की सफाई करें
-दिन में एरोसोल इस्तेमाल करें ताकि मच्छरों के काटने से बचा जा सके
-ऐसे कपड़े नहीं पहनें जिसमें हाथ और पांव खुले दिखाई दें
-शॉर्ट्स और आधी बाजू के कपड़ों में बच्चों को बाहर नहीं खेलने दें
- सोते समय मच्छरदानी या मास्कीटों रिपलेंट इस्तेमाल करें
-ऐनासिन इस्तेमाल ना करें। सिर्फ पैरासिटामोल इस्तेमाल करें