दिल्ली हाईकोर्ट ने नजफगढ़ के मसूदाबाद गांव में एक फार्म हाउस में तोड़फोड़ करने के मामले में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), केंद्र व दिल्ली सरकार और दिल्ली जल बोर्ड को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया ने डीडीए पर गैरकानूनी रूप से तोड़फोड़ करने का आरोप लगाते हुए 10 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने सभी पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि क्यों न याचिका स्वीकार कर ली जाए। अगली सुनवाई 12 मई को होगी।
दहिया के वकील एससी सिंघल ने अदालत को बताया कि नजफगढ़ के मसूदाबाद गांव में उनके मुवक्किल का फार्म हाउस है। फार्म हाउस में उन्होंने नगर निगम से नक्शा पास करा कर आवासीय बिल्डिंग बनाई थी।
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उन्होंने वर्ष 1973 में इमारत का निर्माण किया था, जिसका पूरा प्लान नगर निगम व सरकार द्वारा स्वीकृत है। डीडीए ने उस इलाके में एक फर्जी सर्वे कराया और क्षेत्र में 100 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की योजना तैयार की।
डीडीए अधिकारियों ने अतिक्रमणकारियों से मिलीभगत कर सड़क को उस जगह से प्रस्तावित कर दिया, जहां पर फार्म हाउस बने हैं। वकील सिंघल ने कहा कि फर्जी सर्वे के आधार पर केंद्र व दिल्ली सरकार ने भी इसे मंजूरी देते हुए जमीन के अधिग्रहण का नोटिस जारी कर दिया।
दहिया ने मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, डीडीए ने जमीन पर कब्जा करने के लिए फार्म हाउस की बिल्डिंग को तोड़ दिया।
उनके मुवक्किल को वहां से सामान तक नहीं निकालने दिया गया, जिससे उन्हें 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि वो अधिग्रहण के नोटिस को रद्द कर उन्हें डीडीए से 10 करोड़ रुपये मुआवजा दिलाए।