मर्सिडीज हिट एंड रन मामले में नाबालिग आरोपी की याचिका पर सत्र अदालत ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में आरोपी ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) के फैसले को चुनौती दी है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई के लिए दो जुलाई की तारीख तय की है।
तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विमल कुमार यादव ने नाबालिग आरोपी की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दो जुलाई तक जवाब मांगा है। जेजेबी ने आरोपी पर व्यस्क की तरह सत्र अदालत में मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। नाबालिग आरोपी ने याचिका में कहा है कि जेजेबी ने गलत आधार पर अपना फैसला सुनाया है।
जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में हुए संशोधन के मद्देनजर नाबालिग आरोपी पर व्यस्क की तरह सत्र अदालत में मुकदमा चलाने की अनुमति अभियोजन पक्ष को दी थी। अभियोजन पक्ष ने आरोपी के अपराध को जघन्य बताते हुए उस पर व्यस्क की तरह सत्र अदालत में मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी।
मामला लापरवाही से जान लेने का
नाबालिग के लिए याचिका दायर करने वाले अधिवक्ता राजीव मोहन के मुताबिक, जेजेबी ने गलत आधार पर चार अप्रैल को अपना फैसला सुनाया था। यह फैसला रद्द होना चाहिए। यह मामला लापरवाही से जान लेने का है, लेकिन इसे गैर इरादतन हत्या की धारा में तब्दील कर दिया गया। इस धारा में दोषी साबित होने पर अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान है, लेकिन न्यूनतम सजा का कोई प्रावधान नहीं है।
याची का कहना है कि जेजेबी कानून में हुए बदलाव के मुताबिक किसी नाबालिग पर किसी वयस्क की तरह मुकदमा तब ही चल सकता है जब उसने ऐसा अपराध किया हो। उसमें न्यूनतम सजा सात साल से कम न हो। वहीं पुलिस ने जो धारा लगाई है, उसमें न्यूनतम सजा का कोई प्रावधान नहीं है।
बचाव पक्ष का यह भी आरोप है कि पुलिस ने जेजेबी में चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन इसकी कॉपी उन्हें नहीं दी गई। पुलिस ने किन तथ्यों के आधार पर अपराध की धारा बदली, इसका कारण उन्हें पता नहीं चला। धारा बदलने का कारण जाने बिना ही उन्हें जेजेबी के समक्ष बहस करनी पड़ी।
दोषी साबित होने पर 10 साल तक सजा का प्रावधान
दूसरी ओर अभियोजन पक्ष का कहना है कि गैर इरादतन हत्या की धारा में दोषी साबित होने पर 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। यह जज के विवेक पर है कि वह किसी दोषी को 10 साल तक की सजा सुना सकता है।
अभी नहीं कहा जा सकता कि अदालत इस आरोपी को सात साल या उससे अधिक की सजा नहीं सुना सकती। जेजेबी ने अपने फैसले में कहा था कि घटना के समय आरोपी इस घटना की परिणाम को समझने के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से परिपक्व था। इसलिये उस पर व्यस्क की तरह चिल्ड्रन कोर्ट में मुकदमा चलाने की अनुमति दी जाती है।
पेश मामले में सिविल लाइन इलाके में तेज रफ्तार मर्सिडीज चलाते हुए नाबालिग आरोपी ने चार अप्रैल, 2016 को मार्केटिंग एक्जीक्यूटिव सिद्धार्थ शर्मा (32) को टक्कर मार दी थी। इसमें सिद्धार्थ की मौत हो गई थी।