नोटबंदी की मार सिर्फ आम लोगों पर ही नहीं पड़ रही। बल्कि गोशाला में मौजूद हजार से ज्यादा गायों पर भी इसका असर दिखने लगा है। सेक्टर-94 स्थित गौसदन में अभी जैसे तैसे कर गायों के चारे का इंतजाम किया जा रहा है लेकिन यही हाल रहा तो खाने का इंतजाम कर पाना गोशाला प्रबंधन के लिए चुनौती भरा हो सकता है।
इन दिनों यहां दान देने आनेवाले अधिकांश लोग नकद नहीं के बजाय प्लास्टिक कार्ड के साथ पहुंच रहे हैं जिसे देखते हुए गोशाला प्रबंधन ने बैंक से स्वाइप मशीन की मांग की है।
सेक्टर-94 में गायों के गौ सदन का संचालन किया जा रहा है। यहां करीब एक हजार से ज्यादा गायें हैं। गायों का पालन पोषण खाने पीने का इंतजाम दान प्रक्रिया से होता है। गौ सदन के अकाउंटेंट ने बताया कि नोटबंदी के पहले दान खाते में हर बुधवार को 25 हजार रुपये आते थे। वहीं अन्य दिन पांच हजार रुपये आ जाते थे। लेकिन नोटबंदी के बाद बुधवार को 10 हजार रुपये आ जाए, वही गनीमत है। साथ ही अन्य दिन दो हजार रुपये से ज्यादा दान खातों में हीं आ रहा। उन्होंने कहा कि इन दिनों जो लोग दान देने के लिए आते हैं वह प्लास्टिक कार्ड लेकर या चेक लेकर आ रहे हैं। मना करने पर वह 100, 50 रुपए देकर वापस जा रहे हैं।
ऐसे मे दान में आने वाली रकम काफी घट गई है। फिलहाल ट्रस्ट में मौजूद जमा धन से ही गायों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है साथ ही प्रबंधन की ओर से बैंक में स्वाइप मशीन के लिए एक आवेदन किया गया है। सदन के प्रबंधक संतोष कुमार ने बताया कि नोटबंदी के बाद से दिक्कतें तो आई हैं लेकिन किसी तरह से स्थिति बरकरार रखी गई है।
घटी दान देने वालों की संख्या
पहले जहां प्रतिदिन 20 से 25 लोग दान देने के लिए आते थे। अब चार से पांच लोग पहुंच रहे हैं। यहां आने वाले कुछ लोग चेक लेकर आ रहे हैं। गोशाला प्रबंधन के मुताबिक गायों के लिए खरीदा जाने वाला चारा नकद में खरीदा जाता है।