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60 फीट ऊंचे पेड़ पर चीनी मांझे में उलझे दो कौओं को बचाया, दमकलकर्मियों ने किया रेस्क्यू

Fri, 30 Aug 2019 05:27 AM IST
देव कश्यप शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • इंसान ही नहीं बेजुबानों के लिए भी जान लड़ा देते हैं दमकलकर्मी
  • विकासपुरी में करीब 60 फुट ऊंचे पेड़ की शाखा पर चीनी मांझे में फंसा दो कौआ
  • पक्षी को उलझा देखकर एक शख्स ने दमकल विभाग को दी इसकी सूचना
  • करीब 1.40 मिनट चले ऑपरेशन के बाद दमकल कर्मियों ने कौआ को सुरक्षित बचाया, मांझे से आजाद होते ही उड़ गया
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पेड़ पर चीनी मांझे में फंसे कौए को बचाते दमकलकर्मी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली फायर सर्विस के जवान इंसानों की ही नही बेजुबानों की भी जान बचाने के लिए अपनी जान लड़ा देते हैं। बृहस्पतिवार को विकासपुरी और केशवपुर सब्जी मंडी के पास कुछ ऐसा ही देखने को मिला। दोनों ही जगह यूकेलिप्टस के करीब 60 फुट ऊंचे पेड़ पर दो कौए चीनी मांझे में फंस गए। दमकल कर्मियों ने बड़ी सूझबूझ से तीन बांसों को रस्सी से जोड़कर कौए को किसी तरह बचाया। विकासपुरी में तो चीनी मांझे से आजाद होते ही कौआ उड़ गया, लेकिन पंख फंसने की वजह से केशवपुर में बचाया गया कौआ बुरी तरह जख्मी हो गया। दमकलकर्मी तुरंत उसे लेकर संजय गांधी पक्षी अस्पताल पहुंचे। दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मांझे की चपेट में आने से सबसे अधिक पक्षी घायल होते हैं और कई तो अपनी जान तक गंवा देते हैं। 

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विकासपुरी इलाके में त्रिवेणी अपाटमेंट के पास बृहस्पतिवार सुबह करीब 7.20 बजे दमकल विभाग को सूचना मिली कि एक ऊंचे पेड़ पर कौआ फंसा हुआ है। सूचना मिलते ही जनकपुरी दमकल केंद्र से एसओ राकेश कुमार बिधूड़ी वहां पहुंचे। देखने पर पता चला कि कौआ काफी ऊंचाई पर फंसा था। वहां तक चढ़कर उसे बचा पाना संभव नही था। ऐसे में तीन बड़े-बड़े बांसों के अलावा एक लोहे के हुक का इंतजाम किया गया। पेड़ के नीचे दमकल की गाड़ी को खड़ा कर राकेश व उनके साथी बांस को किसी तरह कौआ तक ले गए, जिसके बाद कोआ को चीनी मांझे से आजाद कराया।

दूसरे मामले में बृहस्पतिवार सुबह 10.36 बजे केशवपुर सब्जी मंडी के पास एक ऊंचे पेड़ में एक और कौआ के फंसे होने की सूचना मिली। एसओ कालूराम अपने स्टॉफ के साथ वहां पहुंचे। पेड़ तक पहुंचने के लिए दमकल कर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी। पड़े के आसपास झाड़ियों को काटा गया। उसके बाद यहां भी विकासपुरी की तरह तीन बांसों को जोड़कर कौआ को बचाया गया। मांझा पंख में फंसने की वजह से कौआ बुरी तरह घायल हो गया। करीब साढ़े तीन घंटे चले रेक्स्यू ऑपरेशन के बाद उसे उतारकर 2.05 बजे संजय गांधी पक्षी अस्पताल ले जाया गया। वहां उसका इलाज जारी है।

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मांझे से सबसे ज्यादा घायल होते हैं परिंदे

दिल्ली फायर सर्विस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जान चाहे किसी इंसान की हो या किसी बेजुबान की, दमकलकर्मी पूरी शिद्दत से बचाने का प्रयास करते हैं। अमूमन हर साल सबसे अधिक पक्षी अगस्त के माह में मांझे की चपेट में आकर घायल होते हैं। उसकी सबसे बड़ी वजह अगस्त माह में दिल्ली में पतंग उड़ाया जाना है। एक जनवरी 2019 से 28 अगस्त तक 1832 पक्षियों की जान को बचाया गया। सिर्फ अगस्त माह में 717 पक्षियों की जान बचाई गई।

पक्षियों को बचाने के 2019 के कुछ आंकड़े...
. जनवरी            207
. फरवरी            184
. मार्च                97
. अप्रैल            149
. मई                126
. जून                130
. जुलाई            222    
. अगस्त            717
(नोट अगस्त माह के आंकड़े एक अगस्त से 28 अगस्त तक के हैं)
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दमकलकर्मियों ने लोगों का भी बचाया जीवन

दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दमकलकर्मियों की भारी कमी होने के बावजूद जवान किसी भी जीवन को बचाने में अपनी पूरी जान लगा देते हैं। यही वजह है कि वर्ष 2018 में दमकल विभाग ने अलग-अलग मामलों में 1597 लोगों की जान बचाई। 28 अगस्त 2019 तक यह आंकड़ा 951 का है।

लोगों की जान बचाने के कुछ आंकड़े...
                              2018            2019
 
  •  बचाया गया            1597            951
  •  लोगों की जान गई     297            132
हर दिन आती 59 कॉल...
  • कॉल        2018            2019
                   31264        14177
    (नोट: 2019 के सभी आंकड़े एक जनवरी से 28 अगस्त के बीच के हैं)
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