उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में 15 आरोपियों को आरोपपत्र की छपी हुई प्रतियां देने संबंधी आदेश के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट 11 नवंबर को सुनवाई करेगी। निचली अदालत ने आरोप पत्र की प्रतियां आरोपियों को देने का निर्देश दिया था। दिल्ली पुलिस ने कहा था कि आरोप पत्र में 18 हजार पन्ने हैं और इसकी प्रतियां बनाने के लिए फंड नहीं है। दिल्ली सरकार से फंड लेने के लिए समय दिया जाए जिससे निचली अदालत ने इनकार कर दिया था।
न्यायमूर्ति सुरेश कैत के समक्ष दिल्ली पुलिस ने कहा कि उनकी याचिका पर जिरह करने के लिए अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल उपलब्ध नहीं है। अदालत ने इसके बाद सुनवाई के लिए 11 नवंबर की तारीख तय कर दी।
दिल्ली पुलिस ने निचली अदालत के आदेश को रद करने की मांग करते हुए कहा कि पुलिस की फाइनल रिपोर्ट ही 2700 पन्नों में है। इसके अलावा केस के दस्तावेज तथा गवाहों के बयान 18 हजार पन्नों में हैं। इसके अलावा 23 खंड हैं जिन्हें कोर्ट में जमा करवाया गया है।
दिल्ली पुलिस का तर्क है कि कानून आरोपी को आरोप पत्र की प्रति मुहैया करवाने का आदेश देता है लेकिन अगर यह बहुत बड़ा और विशाल है तो इसके आरोपी को खुद या अपने वकील के जरिये इसके निरीक्षण करने का निर्देश कोर्ट दे सकती है।