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उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामला : कोर्ट ने पूर्व पार्षद इशरत जहां की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए

Tue, 22 Dec 2020 08:39 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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पूर्व कांग्रेस पार्षद इशरत जहां - फोटो : फाइल फोटो
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अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार कांग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहां की मंडाली जेल में पिटाई को गंभीरता से लिया है। अदालत ने जेल अधिकारियों को इशरत जहां की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस शिकायतों को अदालत के समक्ष लाने के बाद उसे और परेशान न किया जाए। आरोपी ने अदालत के समक्ष आरोप लगाया कि उन्हें मंडोली जेल में कैदियों ने बुरी तरह पीटा और जेल में लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।

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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अमिताभ रावत ने जेल अधिकारियों से इस मामले में उठाए गए कदमों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए कहा कि यदि आरोपी को दूसरी जेल में शिफ्ट करने की जरूरत है तो यह भी बताया जाए। अदालत के पूछने पर मंडोली जेल के सहायक अधीक्षक ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि याची की सुरक्षा के आवश्यक कदम उठाए गए हैं। अदालत के समक्ष आरोपियों ने प्रताड़ना व आतंकवादी कहने का लगाया भी आरोप लगाया।

अदालत ने जेल अधिकारी से कहा जब आरोपी भय की स्थिति में है  तो तुरंत उससे  बात करें और स्थिति को समझें । उसकी आशंका और उसके डर को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कहा कि आप  तत्काल सभी आवश्यक कदम उठाएं । वे यह नहीं सुनना चाहते कि आरोपी को  कैदियों या किसी और ने इसलिए और परेशान किया क्योंकि उसने शिकायत की थी। अदालत ने आरोपी को बुधवार को वीडियों कांफ्रेंसिग के जरिए पेश करने का निर्देश देते हुए कहा कि आरोपी को किसी भी तरह से नुकसान नहीं  पहुंचाया  जाना चाहिए।
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अधिवक्ता प्रदीप तेवतिया के जरिए जहां ने अदालत को बताया कि उनके साथ ये एक महीने के भीतर दूसरी घटना थी और लगातार उत्पीड़न, शारीरिक और मौखिक रूप से उसे परेशान किया जा रहा है, जिसके कारण वह बेहद तनाव में  है। उन्होंने कहा आज सुबह 6:30 बजे कैदियों ने मुझे बुरी तरह पीटा और मौखिक रूप से गाली दी ।

एक कैदी ने उसका हाथ भी काट दिया ताकि मुझे झूठी शिकायत पर सजा मिल जाए। उन्होंने कहा जेल अधिकारियों ने उनकी शिकायत नहीं सुनी। मैंने लिखित शिकायत भी दी है। वे मुझे आतंकवादी कहते रहते हैं। जहां ने आरोप लगाया कैंटीन में मुझसे पैसे की मांग भी की गई है। उन्होंने कहा पहले भी उसने प्रताड़ना से तंग आकर उसे तिहाड़ जेल में स्थानांतरित करने का आग्रह किया था लेकिन कोविड महामारी के कारण इसे अस्वीकार कर दिया गया था ।

वहीं मामले में सह-अभियुक्त और आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन की ओर से पेश हुए अधिवक्ता रिजवान ने कहा कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के मामलों के ज्यादातर आरोपियों को जेल में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं ट्रायल से पहले ही उन्हें आतंकवादी घोषित किया गया है ।

इस मामले के एक अन्य आरोपी जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा ने कहा कि उनके परिवार के सदस्य वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उनसे मिलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनके अनुरोध को मंजूरी नहीं मिली है। तन्हा ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जेल में बार-बार आतंकवादी कहा जाता रहा है ।अदालत ने इस पर कहा, एक आरोपी आरोपी होता है, दोषी नहीं। अदालत ने मामले की सुनवाई 5 जनवरी तय की है।

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