तीनों नगर निगम चुनाव में भारी बहुमत से जीत हासिल करने के बाद नगर निगम के अधिकारियों के निर्णय के चलते भाजपा के समक्ष मुश्किलें पैदा होती जा रही है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने निजी कंपनी के माध्यम से अनुबंध पर रखे गए डाटा एंट्री ऑपरेटरों को नौकरी से निकालने का निर्णय किया है। नगर निगम ने उन्हें तीन जून से नौकरी से हटाने की तैयारी की है। इससे पहले पिछले महीने के अंत में नगर निगम ने अस्थायी नर्सों का नौकरी से हटा दिया था।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने इस सप्ताह डाटा एंट्री ऑपरेटरों को नौकरी से हटाने का निर्णय लिया है। इस बारे में मालूम होते ही डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने नौकरी बचाने की कवायद आरंभ कर दी। उन्होंने शनिवार को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी का दरवाजा खटखटाया। वह सुबह मनोज तिवारी के घर पहुंचे, जहां मनोज तिवारी ने उनकी बातें सुनने के बाद प्रदेश कार्यालय पहुंचने का आग्रह किया।
उधर, मनोज तिवारी से मिलने के बाद करीब साढ़े तीन सौ डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने प्रदेश भाजपा कार्यालय में डेरा डाल दिया। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। वर्तमान वर्ष का बजट प्रस्तुत करने के दौरान स्थायी समिति के अध्यक्ष ने भाषण में उन्हें सीधे तौर पर नगर निगम के अधीन लेने का ऐलान किया था। बाकायदा उनके बजट भाषण में यह बातें उल्लेखित है। मगर नगर निगम उन्हें अपने अधीन लेने के बजाए नौकरी से निकाल रही है।
डाटा एंट्री ऑपरेटरों ने कहा कि उन्हें नगर निगम के विभिन्न विभागों में नौकरी करते हुए पांच से लेकर दस साल हो गए है। ऐसे में उनके समक्ष अब नौकरी करने का कोई रास्ता नहीं बचा है। इस दौरान उन्होंने भाजपा के विभिन्न नेताओं से आग्रह किया है कि जैसे अस्थायी नर्सों को पुन: नौकरी पर रखा है, वैसे ही उन्हें भी नौकरी पर रखा जाए। उधर, महापौर प्रीति अग्रवाल ने कहा कि वह पूरे मामले पर अधिकारियों से बात कर रही है और डाटा एंट्री ऑपरेटरों को राहत दिलाने का रास्ता निकालने में लगी हुई है।