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पायलट थकान नियम लागू न करना सार्वजनिक सुरक्षा से खिलवाड़ : हाईकोर्ट

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अदालत ने अगली सुनवाई में डीजीसीए के वकील को निर्देश लेकर आने कहा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि डीजीसीए (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) द्वारा पायलटों की थकान रोकने वाले अनिवार्य नियमों को लागू न करने से उत्पन्न सार्वजनिक सुरक्षा की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने इंडिगो एयरलाइंस के संचालन में हालिया बड़े व्यवधान के बाद 5 दिसंबर 2025 को डीजीसीए द्वारा पायलटों के लिए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियमों में दी गई छूट के खिलाफ दायर जनहित याचिका (पीआईएल) की सुनवाई करते हुए यह मौखिक टिप्पणी की।
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पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए डीजीसीए के वकील से निर्देश लेकर आने को कहा। कोर्ट ने कहा कि एक बार नियम लागू हो जाने के बाद उन्हें लागू करना चाहिए, जब तक कि कोई वैध कारण या संशोधन न हो। अदालत ने कहा कि यह यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा मुद्दा है। नियम लागू होने के बाद उन्हें लागू करना जरूरी है, जब तक कि उन्हें चुनौती न दी जाए या उनमें कोई खामी न पाई जाए। हम नियमों के तर्क पर विचार नहीं कर रहे, लेकिन नियम लागू हैं तो उन्हें मानना होगा। पीठ ने यह भी माना कि याचिकाएं नियामक संस्थाओं पर दबाव बनाती हैं और कभी-कभी वे उस दबाव में झुक जाती हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि डीजीसीए ने केवल इंडिगो को लाभ पहुंचाने के लिए थकान नियमों में छूट दी, जो प्रथम दृष्टया दुर्भावनापूर्ण है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि छूट संबंधी अधिसूचना सभी एयरलाइंस पर लागू है।
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