योजना के नाम पर हजारों दलित छात्रों की कोचिंग के फर्जी बिल बनाकर करोड़ों का गबन किया गया। जुलाई 2021 से अगस्त 2022 के बीच 13 हजार छात्रों की कोचिंग के नाम पर 145 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जबकि जांच में सामने आया कि इनमें से 10 हजार छात्रों का कोई रिकॉर्ड ही मौजूद नहीं है। केजरीवाल सरकार, मंत्रिमंडल और कोचिंग माफिया इस गबन में शामिल हैं। कोविड काल में योजना के लिए सिर्फ 15 करोड़ रुपये का बजट था लेकिन कोचिंग संस्थानों ने 145 करोड़ के बिल जमा किए। यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की साजिश है। जब योजना दलित छात्रों के लिए थी तो उसे 2022 में क्यों बंद कर दिया गया। इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने उपराज्यपाल से मांग की कि मामले की जांच केवल एसीबी से नहीं बल्कि सीबीआई से करवाई जाए।