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Noida News: तुम एक सैनिक के बेटे हो, हारना तुम्हारे खून में नहीं

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मां के आंचल से निकलकर वर्दी की शान तक
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ज्योति सिंह
ग्रेटर नोएडा। मां... सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि वो भावना है जिसमें त्याग, प्रेम, बलिदान और शक्ति का संगम होता है। लेकिन कुछ मांएं ऐसी भी होती हैं जो केवल अपने बच्चों के लिए नहीं, देश के लिए भी जीती हैं। जिन्होंने अपने कलेजे के टुकड़े को देश पर न्योछावर कर दिया। जवानी में पति को बॉर्डर पर भेजकर ताउम्र इंतजार करना चुना, वहीं अब ढलती उम्र में बेटे के उन जिम्मेदार हाथों को थामने को तरस रहे हैं, जिन हाथों में देश की जिम्मेदारी है। मदर्स डे के अवसर पर हम आपको ऐसी ही मांओं से मिलवा रहे हैं, जो खुद कभी बॉर्डर पर नहीं गईं, लेकिन उनका दिल, उनका सब्र और उनका प्रेम हमेशा देश के लिए धड़कता रहा।


-मैंने कलेजे के टुकड़े के रूप में शेर भेजा है
अनु शर्मा के पति मेजर जनरल दिनेश शर्मा ने कई वर्षों तक देश की सेबा की। अब उनका बेटा वायुसेना में देश के लिए लड़ रहा हैं। अनु शर्मा कहती हैं, वो मेरी बहुत परवाह करता है। मैं जब भी फोन करती हूं तो वो मुझे चंद मिनटों में ही चिंतामुक्त कर देता है। लेकिन मैं उसे कहना चाहती हूं कि सैनिक हमेशा राष्ट्र को सबसे पहले रखते हैं। हमारे देश की सुरक्षा ही सर्वोपरि है।
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-मां, यहां सब ठीक है आप अपना ख्याल रखो
सुनीता देवी के बेटे मेजर अभिषेक भारतीय थल सेना में हैं। इससे पहले उनके पति कर्नल लाखन सिंह ने भी देश की सेवा में सहयोग किया है। सुनीता देवी कहती हैं, कि मेरा एक ही बेटा है, बावजूद इसके मैंने उसे सेना में भेजा। मेरे पति ने देश की सेवा में कई साल गुजार दिए। अब मेरा बेटा देश के लिए लड़ाई लड़ रहा है। आज भी जब भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच उसे फोन किया तो उसने कहा- मां यहां सब ठीक है आप अपना ख्याल रखो।


-सूना आंगन भी उसके इंतजार में है
चिंता मत करना यहां सब ठीक है, तुम बस देश पर ध्यान दो। ये कहना है दादरी की रहने वाली रेखा देवी का। रेखा देवी के बेटे धनेन्दर आर्मी में हैं। इसके अलावा उनके पति ने भी पूरी उम्र देश की सेवा की है। रेखा कहती हैं कि जब मेरे बेटे ने सेना को ज्वाइन किया तो मेरी आंखों में आंसू थे। उन आंसुओं में दो भावनाएं बह रही थीं। वो जब भी छुट्टियों में आता है तो घर में रौनक आ जाती है। मानों आंगन भी उसके इंतजार में रहती हो।
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तुम्हारे हाथों के खाने की याद आएगी

वो जब घर आता है तो उसकी सारी मन पसंदीदा चीजें बनाती हूं। वो हमेशा जाते वक्त कहता कि मां तुम्हारे हाथों के खाने की याद आएगी। अपने बेटे की यादों को साझा करते हुए शशि यादव ऐसा कहती हैं। शशि के पति कर्नल बीसी यादव भी सेना में देश की सेवा कर चुके हैं, और अब उनका बेटा सिद्दांत बतौर पायलट देश की सेवा कर रहे हैं। शशि कहती हैं, कि हमारे लिए देश ही सब कुछ है। पहले मेरे पति ने देश की सेवा की अब मेरा बेटा देश के लिए काम कर रहा है।
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