इस योजना का क्रियान्वन महिला कल्याण विभाग द्वारा किया जाएगा। विभागीय सूत्रों के मुताबिक योजना का लाभ सिर्फ उन बच्चों को ही दिया जाएगा, जिनके मां-बाप की कोरोना संक्रमण के चलते मौत हुई है।
अर्थात एक मार्च 2020 के बाद जो बच्चे अनाथ हुए हैं, उनको ही योजना के दायरे में रखा जाएगा। हालांकि महिला कल्याण विभाग इस योजना को प्रारूप को अंतिम रुप देने में जुटा है। संभावना है कि अगली कैबिनेट की बैठक में योजना को मंजूरी दिलाने के बाद इसे तत्काल लागू कर दिया जाएगा।
योजना की खास बातें
- अबोध बच्चे के वयस्क होने तक उनका देखभाल करने वाले को सरकार 4000 प्रति माह की वित्तीय मदद देगी।
- दस वर्ष की आयु से कम आयु वाले अनाथ बच्चों को प्रदेश व केंद्र सरकार द्वारा लखनऊ, मथुरा, प्रयागराज, आगरा व रामपुर संचालित राजकीय बाल गृह रखकर देखभाल की जाएगी।
- अवयस्क बालिकाओं को सरकार द्वारा संचालित अवासीय कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों राजकीय बाल गृह (बालिका) में रखा जाएगा। वहीं पर उनकी देखभाल और शिक्षा-दीक्षा के भी प्रबंध होंगे। इसके अलावा 18 अटल आवासीय विद्यालयों में भी इनकी देखभाल की व्यवस्था की जाएगी।
- अनाथ बालिकाओं के विवाह के लिए भी प्रदेश सरकार एक लाख एक हजार रुपये की धनराशि उपलब्ध कराएगी।
- स्कूल या कॉलेज में या व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे ऐसे सभी बच्चों को भी सरकार की ओर से निशुल्क टैबलेट व लैपटॉप दिया जाएगा।