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Noida News: सात गांवों में औद्योगिक सेक्टरों के विवाद शून्य करेगा यीडा

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सात गांवों में औद्योगिक सेक्टरों के विवाद शून्य करेगा यीडा
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सीईओ ने बनाईं टीमें, पेरीफेरल रोड बनाकर गांवों के आसपास आवंटित किए जाएंगे आबादी भूखंड
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। यमुना सिटी में औद्योगिक विकास तेज करने के लिए प्रमुख सेक्टरों में विधिक विवाद यीडा शून्य करेगा। विदेशी निवेशकों में विवादों की वजह से जमीन मिलने में देरी के डर से निवेश में झिझक को दूर करने के लिए होली के बाद इस पर काम शुरू होना है।
पहले चरण में करीब सात गांवों को चिन्हह्त किया गया है। यहां आबादी के चारों तरफ न्यूनतम 15 मीटर चौड़ी पेरीफेरल रोड बनाकर काश्तकारों के सात फीसदी भूखंड पर भी कब्जा दे दिया जाएगा। सीईओ राकेश कुमार सिंह ने इसके लिए एक बैठक भी अधिकारियों और तहसीलदारों के साथ शनिवार को की थी। सीईओ का कहना है कि औद्योगिक विकास को तेज करने के लिए जरूरी है कि काश्तकारों की समस्याओं को पहले दूर किया जाए। लंबे समय तक इन विवादों को सुलझाने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है कि किसानों को जहां बचा हुआ 64 प्रतिशत मुआवजा बांटा जाए वहीं सात प्रतिशत भूखंड भी उनको मिले। बोर्ड के फैसले को ध्यान में रखते हुए आबादी के पास मौजूद भूखंड से अधिक काश्तकार होने पर उनको विकसित सेक्टरों में भूखंड दिए जाने के लिए सूची भी बनाने के लिए आदेश हुआ है।
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सीईओ का कहना है कि काश्तकारों को कोई असुविधा नहीं हो। उनको समय पर मुआवजा और आबादी भूखंड मिले, इसे भी सुनिश्चित कराया जाएगा। न्यूनतम समय में यह काम पेरीफेरल रोड बनाते हुए होगा। पेरीफेरल रोड बनाने के साथ ही सेक्टरों की जमीन पर वहां हुए अस्थायी व स्थायी निर्माणों को भी तोड़ दिया जाएगा। ओएसडी शैलेंद्र सिंह को खासतौर पर अपैरल पार्क की दिक्कतें दूर करने के लिए कहा गया है, जिससे उद्यमी अपने काम शुरू कर सकें।
इन गांवों में शुरू होगा काम
जगनपुर अफजलपुर, अट्टा गुजरान, मुरादगढ़ी, उतावली, मुरथोल, मिर्जापुर, करौली बांगर। यहां काश्तकारों को भूखंड देने के लिए सबसे पहले पेरीफेरल रोड बनाई जाएगी। अधिकारी सीधे वार्ता भी इनसे करेंगे।
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दयानतपुर में मिले बाहरी निवेशक
पिछले दिनों सीईओ ने एक सर्वे दयानतपुर में कराया था। यहां केवल 10 प्रतिशत ही स्थानीय काश्तकार मिले। इसके अलावा 90 प्रतिशत लोग बाहरी निवेशक थे जोकि यमुना सिटी में रिटर्न के लालच में जमीन खरीदे। सीईओ का कहना है कि प्राथमिकता पर पहले स्थानीय काश्तकारों को सात प्रतिशत भूखंड दिए जाएंगे।
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