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जांच में यथार्थ-कैलाश अस्पताल दोषी, शर्मा अस्पताल को क्लीन चिट

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नोएडा। सेक्टर-59 स्थित कोविड कंट्रोल रूम में मंगलवार को पैंडेमिक पब्लिक ग्रीवांस कमेटी (पीपीजीएफ) की बैठक हुई। इसमें कोविड संकट के दौरान जिले के विभिन्न निजी अस्पतालों पर लगे आरोपों पर चर्चा हुई। सभी मामलों की पड़ताल के बाद कमेटी ने यथार्थ और कैलाश अस्पताल प्रबंधन को दोषी मानते हुए कार्रवाई के आदेश दिए हैं। यथार्थ अस्पताल प्रबंधन को वसूली गई अतिरिक्त धनराशि 3.39 लाख रुपये पीड़ित को दस दिन के अंदर लौटाने का आदेश दिया गया है। जबकि कैलाश अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिया गया है कि वह दोषी कर्मियों को पहचानकर उन पर कार्रवाई करें और इससे कमेटी को अवगत कराएं। वहीं, शिकायत वापस लेने के कारण कमेटी ने शर्मा अस्पताल को क्लीन चिट दी है। बैठक में प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुशील कुमार, एडीएम प्रशासन दिवाकर सिंह, एसीएमओ डॉ. ललित, एसीएमओ डॉ. सुनील दोहरे और डॉ. अनिल गुप्ता आदि अधिकारी मौजूद रहे।
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शर्मा अस्पताल के खिलाफ शिकायतकर्ता लोकेंद्र ने आरोप लगाया था कि उनकी पत्नी सीमा देवी के कानों से मृत्यु के बाद अस्पताल स्टाफ ने बालियां चुराई हैं। जांच में यह बात सामने आई है कि शिकायतकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर है। वह अस्पताल का बिल चुकाने में समर्थ नहीं था। अस्पताल द्वारा निर्धारित 65 हजार रुपये का बिल शिकायतकर्ता के लिए अधिक था। उसकी विनती पर अस्पताल ने 50 हजार माफ कर दिए और शेष 15 हजार भी एक साल के अंदर अदा करने की मोहलत दी। अस्पताल ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इंकार किया। वहीं शिकायतकर्ता ने भी अपनी शिकायत वापस ली है। इसके बाद कमेटी द्वारा यह मामला निस्तारित कर दिया गया।
यथार्थ को लौटानी होगी कोरोना काल में वसूली अतिरिक्त धनराशि
ग्रेनो स्थित यथार्थ अस्पताल के खिलाफ कमल त्यागी ने आरोप लगाया था कि अस्पताल ने उनके पिता के इलाज में निश्चित धनराशि से ज्यादा वसूली की है। पिता नरेंद्र त्यागी 15 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती हुए। 7 मई को इलाज के बाद उन्हें डिस्चार्ज किया गया। 10 मई को उनकी मृत्यु हो गई। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनके पिता 13 दिन आईसीयू वेंटिलेटर और 9 दिन बिना वेंटिलेटर रहे जिसके लिए अस्पताल ने 3.69 लाख रुपये चार्ज किया। वहीं, पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, चिकित्सीय परामर्श, फार्मेसी आदि मदों को मिलाकर अस्पताल ने कुल 8 लाख का बिल बनाया। जबकि सरकार द्वारा विभिन्न इलाजों के लिए तय की गई धनराशि के अनुरूप यह रकम ज्यादा थी। कमेटी ने कुल खर्चों की जांच की और निष्कर्ष निकाला कि 3.39 लाख रुपये अस्पताल ने अधिक वसूले हैं। जिसे वापस कर कमेटी को इसकी जानकारी देने के लिए 10 दिन का वक्त अस्पताल को दिया। ऐसा न करने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
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कैलाश कर्मियों पर लगे इलाज में अभद्रता के आरोप, कार्रवाई के निर्देश
कमेटी के सामने सेक्टर-71 स्थित कैलाश अस्पताल का एक मामला सामने आया। पीड़िता कल्पना पांडे ने आरोप लगाया कि अस्पताल की लापरवाही से उनके पति की जान गई। साथ ही अस्पताल ने इलाज के नाम पर मनमाने रुपये वसूले हैं। 17 मई को पति के चेहरे से ऑक्सीजन मास्क हटाकर कुछ स्टाफ ने अभद्र भाषा में बात की। 16 मई को मरीज ने डायपर में यूरीन किया जिसे स्टाफ ने करीब 8 घंटे तक साफ नहीं किया। कमेटी के अनुसार मामले में पक्ष एवं विपक्ष के तर्कों को सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकला है कि दो व्यक्तियों द्वारा नर्सिंग नियमावली के विरुद्ध अभद्र व्यवहार किया गया जिससे मरीज की हालत बिगड़ी। मामले में अस्पताल प्रबंधन द्वारा कार्रवाई की जानी आवश्यक थी, लेकिन प्रथमदृष्टया अस्पताल प्रबंधन ने संदिग्ध कर्मियों पर कार्रवाई में कोई रुचि नहीं ली। कमेटी ने निर्देश दिया कि दोषी कर्मियों पर कार्रवाई कर कमेटी को सूचित किया जाए। ऐसा ना करने पर सीएमओ द्वारा दोषी कर्मियों सहित अस्पताल पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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