राधाकुंड के गौरधाम अतिथि भवन परिसर में मौजूद संत
राधाकुंड। गौरधाम ट्रस्ट के तत्वावधान में 138वें आविर्भाव महोत्सव के अवसर पर श्रीगौरधाम आश्रम में संत-विद्वत सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में गोवर्धन के निर्वाणी व निर्मोही अखाड़ों से आए निशान चिह्नों का पूजन किया।
सम्मेलन में व्यास प्रवर वैष्णव पद दास महाराज ने बताया कि ब्रज सुंदर दास बाबा आठ वर्ष की आयु में 1898 में राधाकुंड आए और भजन साधना करने लगे। ब्रजवासियों के घरों से मधुकरी कर भजन कर जीवन यापन किया। देश की स्वतंत्रता के बाद अविकसित राधाकुंड के विकास के लिए संकल्प लिया। स्कूल और अस्पताल की स्थापना की।
किलोल कुंड के महंत बाबू बाबा ने बताया कि हमारे पूर्वज संतों के आदर्शों पर चलकर सेवा कर रहे हैं। राघव दास महाराज ने बताया कि देश प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित है। ऐसे में पेड़ लगाने की आवश्यकता है। स्वरूप दास महाराज ने बताया राष्ट्र के कल्याण के लिए कि गाय की सेवा जरूरी है।
अध्यक्षता श्रीपाद रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी के पीठाधीश्वर महंत केशव दास महाराज ने की। आयोजक उमेश शर्मा ने संत-महंतों का स्वागत किया। संचालन राम सहाय तिवारी ने किया व संयोजक लक्ष्मण लाल ने आभार जताया। इस अवसर पर पीठाधीश्वर महंत केशव दास महाराज, ब्रजकिशोर गोस्वामी, उमेश शर्मा, लक्ष्मण लाल अग्रवाल, आयुष अग्रवाल, नीरज कौशिक, राघवेंद्र दास, सुबल दास, चिन्मय, निताई दास, कनिका प्रसाद गोस्वामी, डाॅ. ऋषभ शर्मा आदि मौजूद रहे।