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Noida News: राधा बिना आराधना अधूरी

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माताजी गोशाला में कथा व्यास का पूजन करते श्रद्धालु। 
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बरसाना। माताजी गोशाला में चल रही श्रीमदभागवत कथा में व्यासपीठ से भागवत प्रवक्ता रमेश भाई ओझा ने कहा कि जो धारा अविरल बहती है कृष्ण प्रेम की, उसका नाम ही राधा है। श्रीकृष्ण की आराधिका ही राधिका हैं। बिना राधा के आराधन संभव नहीं।
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श्री ओझा ने कहा कि प्रेमपूर्वक की गई सेवा में सेवक को सिर्फ सेव्य के सुख का चिंतन होना चाहिए। यदि सेवक सेवा से सुख लेने लगे तो वह भोग बन जाती है जबकि सेव्य को सेवा से सुखी देखकर सेवक को जो तृप्ति मिलती है वही प्रसाद कहलाती है। ब्रजभूमि के दिव्य स्वरूप का चित्रण करते हुए कहा कि यहां का कण-कण राधा-कृष्ण की लीलाओं का साक्षी हैं। आज ब्रज का जो सौंदर्य दिखाई देता है, वह महापुरुषों की साधना और प्रयासों से संभव हुआ है। पद्मश्री संत रमेश बाबा महाराज के संरक्षण कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि बाबा ने संघर्ष करते हुए ब्रज के पर्वतों को नष्ट होने से बचाया।
शाम को सिया दीदी एवं उनके सहयोगियों द्वारा सीताराम विवाह महोत्सव लीला का भावपूर्ण मंचन किया। कार्यक्रम में डॉ. नरेश शर्मा, विश्व हिंदू परिषद के गोरक्षा प्रमुख दिनेश, नृसिंह बाबा, भक्त शरण बाबा, सुरेश चंद्र शास्त्री, संतराम दास बाबा, राधा प्रिय, मान मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामजीलाल शास्त्री, कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री, सचिव ब्रजदास सुनील सिंह तथा माताजी गोशाला के संयोजक ब्रजशरण दास मौजूद रहे।
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