पुन्हाना। कृषि के तीन बिलों को वापिस लेने और एमएसपी पर कानूनी गारंटी देने की मांग को लेकर नूंह जिला के सुनहेड़ा बॉर्डर पर किसानों का धरना सोमवार को 56वें दिन भी जारी रहा। सोमवार को महिला दिवस के मौके पर सैकड़ों महिलाएं धरनास्थल पर पहुंची और धरने की बागडोर संभाली। महिलाओं ने ऐलान किया कि मेवात की हजारों महिलाएं किसानों के साथ कंधा से कंधा मिलाकर सहयोग करती रहेंगी।
इस दौरान स्टेज संचालन मेवात की पहली ग्रेजुऐट महिला मोहम्मदी बेगम ने किया जबकि सामिया तहजीब, रुकैय्या, वसीमा खान एडवोकेट महिलाओं ने किसानों को संबोधित कर सरकार से तीनों कानून वापिस लेने की मांग की। मोहम्मदी बेगम, सामिया तहजीब, रुकैय्या और वसीमा खान एडवोकेट ने कहा कि आयोजकों ने महिला दिवस पर महिलाओं को संचालन की जिम्मेदारी और बोलने का मौका देकर मान बढ़ाया है।
महिलाओं का कहना है कि दिल्ली की सीमाओं पर किसानों को बैठे 100 से अधिक दिन होने के बावजूद सरकार पर कोई असर नहीं है। ये जनता की सरकार नहीं बल्कि हिटलर सरकार है। एक दिन सरकार को किसानों के सामने मजबूर होकर झुकना ही पड़ेगा।
महिलाओं के अलावा धरने में पहुंचे सुभान खां सिंगारिया, ऐडवोकेट समय सिंह, मौलाना मोहम्मद अजहर व मोलाना राशिद मीलखेड़ला ने कहा कि अब किसानों ने ठान लिया है कि कानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं। तीनों कानूनों को वापिस कराकर ही घर जाएंगे। इसके लिए उन्हें चाहे कितने दिन ही लड़ना पड़े। उन्होंने कहा ये असंवेदनशील सरकार है, जिसने 300 किसानों की शहादत पर एक शब्द नहीं बोला।