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Noida News: उत्पीड़न की जांच करने पहुंची महिला से दफ्तर में अभद्रता

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उत्पीड़न की जांच करने पहुंची महिला से दफ्तर में अभद्रता
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पूर्व कर्मचारी बताकर रोका
सेक्टर-142 स्थित निजी कंपनी के दफ्तर में जिला प्रोबेशन अधिकारी संग जांच के लिए पहुंचने के दौरान धक्का देने का आरोप
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। सेक्टर-142 स्थित एक निजी हेल्थकेयर कंपनी के कार्यालय में उत्पीड़न की शिकायत की जांच के दौरान महिला के साथ अभद्रता और धक्का-मुक्की का मामला सामने आया है। पीड़िता की शिकायत पर सेक्टर-142 थाना पुलिस ने सोमवार को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दिल्ली निवासी पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह पहले इनोवोल्यूशन हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड में कार्यरत थी। उन्होंने कंपनी में उत्पीड़न से संबंधित शिकायत की थी, जिसकी जांच के सिलसिले में वह जिला प्रोबेशन अधिकारी और अन्य अधिकारियों के साथ 29 जून को सेक्टर-142 स्थित एडवांट नेविस आईटी पार्क के कार्यालय पहुंची थी। शिकायत के मुताबिक जांच टीम के कार्यालय पहुंचने पर आरोपी राजीव शर्मा ने जिला प्रोबेशन अधिकारी को तो अंदर जाने दिया लेकिन उन्हें पीछे से कार्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया। आरोप है कि आरोपी ने उनकी छाती पर हाथ रखकर धक्का दिया और कहा कि वह पूर्व कर्मचारी हैं, इसलिए अंदर नहीं जा सकतीं। विरोध करने पर कथित रूप से उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया।
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महिला का यह भी आरोप है कि आरोपी की हरकत का उद्देश्य केवल शारीरिक दुर्व्यवहार करना नहीं था बल्कि उन्हें डराकर उत्पीड़न संबंधी शिकायत वापस लेने और जांच को प्रभावित करने का प्रयास भी था। घटना के तुरंत बाद उन्होंने यूपी-112 पर कॉल कर पुलिस सहायता मांगी। इसके बाद संबंधित थाने में लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की। वहीं पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-75 (यौन उत्पीड़न) और 352 शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। कोतवाली प्रभारी संजय सिंह का कहना है कि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
आईसीसी की अनदेखी करती हैं कंपनियां
कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम और उनकी शिकायतों के निष्पक्ष निवारण के लिए आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या असहज माहौल की स्थिति में तुरंत सहायता प्राप्त करने के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण तंत्र है। सर्वोच्च न्यायालय के विशाखा गाइडलाइंस और कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत, किसी भी कार्यालय, संस्थान या फैक्टरी (जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी हैं) में आईसीसी का गठन अनिवार्य है। समिति की अध्यक्ष हमेशा संस्थान की वरिष्ठ महिला कर्मचारी होती हैं। जबकि इसमें महिलाओं के अधिकारों या सामाजिक कार्य से जुड़ी किसी गैर-सरकारी संस्था (एनजीओ) की एक बाहरी सदस्य को भी शामिल किया जाता है। पीड़ित महिला घटना के तीन महीने के भीतर लिखित रूप में आईसीसी के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकती है। समिति को शिकायत मिलने के बाद जांच पूरी कर 90 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट और आवश्यक कार्रवाई की संस्तुति देना अनिवार्य होता है।
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डीपीओ विभाग की ओर से नहीं होता है नियमित निरीक्षण
जिले में आईसीसी की देखरेख की निगरानी का काम डीपीओ का होता है। मगर विभाग और अधिकारियों की ओर से लापरवाही बरती जाती है। नियम के तहत किसी कार्यस्थल पर आईसीसी का गठन नहीं है या महिला को अन्य किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता है, तो वह राष्ट्रीय महिला आयोग की हेल्पलाइन 14490, महिला हेल्पलाइन-181 या 1090 (उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों में) पर संपर्क कर सकती है। इसके अलावा केंद्र सरकार के संगठनों और संस्थानों के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का (शी-बॉक्स) ऑनलाइन पोर्टल भी शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराता है।
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