चिकित्सा प्रभारी अधिकारी डॉ. पवन कुमार ने बताया कि जेवर मोहल्ला दाऊजी निवासी 32 वर्षीय अलका की कोविड जांच कराए बिना झोलाछाप ने 15 ग्लूकोज की बोतलें चढ़ा दीं। ऐसे में मरीज की स्थिति लगातार खराब होती गई।
ग्रेटर नोएडा के जेवर में एक झोलाछाप ने महिला मरीज की कोविड की जांच किए बिना ही 15 ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दीं। ऐसे में उसकी हालत और खराब होती गई और मृत्यु हो गई।
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अब जिलाधिकारी के निर्देश पर जेवर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी ने ओरापी के खिलाफ आईपीसी की धाराओं और कोविड महामारी रोकथाम अधिनियम के अंतर्गत कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी और एसएचओ को पत्र लिखा है, ताकि प्राथमिक दर्ज कार्रवाई की जा सके।
चिकित्सा प्रभारी अधिकारी डॉ. पवन कुमार ने बताया कि जेवर मोहल्ला दाऊजी निवासी 32 वर्षीय अलका की कोविड जांच कराए बिना झोलाछाप ने 15 ग्लूकोज की बोतलें चढ़ा दीं। ऐसे में मरीज की स्थिति लगातार खराब होती गई। परिजन सुबह ई-रिक्शा से महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर आए थे। यहां मरीज ने दम तोड़ दिया।
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वहीं, आरोपी झोलाछाप का कहना है कि मरीज के परिजन बुधवार को इलाज के लिए आए थे। उन्हें अस्पताल लेकर जाने के लिए कहा था, लेकिन परिजन यहीं पर इलाज कराने की जिद करने लगे। तबीयत में सुधार भी आया था, लेकिन बृहस्पतिवार सुबह मौत हो गई।
गौतमबुद्धनगर : जांच हो रहीं कम, ग्रामीण तोड़ रहे दम
गौतमबुद्धनगर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बुखार से रोजाना लोग दम तोड़ रहे हैं। इसके बाद भी इन क्षेत्रों में कोविड जांच बढ़ाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। गांवों में लगाए जा रहे शिविरों में भी एंटीजन किट से जांच हो रही है, ऐसे में संक्रमण की सही स्थिति का पता नहीं चल पा रहा है। इस वजह से गंभीर मरीजों को सही इलाज भी नहीं मिल पाता। लोगों का कहना है कि आरटीपीसीआर जांच बढ़ाकर बीमारी पर काबू पाना चाहिए।
पंचायत चुनाव के समय से ही ग्रामीण क्षेत्रों में बुखार से लोगों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया था। शुरुआत में इस पर ध्यान नहीं दिया गया। मीडिया रिपोर्ट आने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने गांवों में शिविर लगाकर जांच करनी शुरू की। लेकिन शिविरों में अमूमन एंटीजन जांच होती है, जिसमें संक्रमण की स्थिति का बहुत कम पता चल पाता है।
दादरी, जेवर, दनकौर, बिलासपुर, जारचा व रबूपुरा में लोग बुखार से दम तोड़ रहे हैं। उनकी एंटीजन और कुछ मामलों में आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आती है। सीटी स्कैन कराने की सुविधा भी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि समय से बीमारी का पता नहीं चलने और इलाज के अभाव में लोग दम तोड़ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 1 से 14 मई के बीच शिविरों में 3639 सैंपल की जांच की गई। जिनमें 167 लोग पॉजिटिव आए हैं। ऐसे में संक्रमित होने की दर करीब 5 फीसदी रही। बीते बृहस्पतिवार को दादरी के 16 गांवों में शिविर लगाकर 1056 लोगों की जांच की गई। यहां 14 लोग संक्रमित मिले। ऐसे ही जेवर में 20 अप्रैल के आसपास 450 जांच में करीब 30 से 35 लोग कोरोना संक्रमित पाए जा रहे थे, जबकि माह के अंत में संक्रमितों की संख्या घटकर 15 से 20 रह गई।
मई के पहले सप्ताह में करीब 300 जांच प्रतिदिन हुई, जिनमें रोजाना 10 से 12 संक्रमित मिले। दादरी के सभासद सुमित वैसोया का कहना है कि शासन-प्रशासन का पूरा ध्यान शहर में व्यवस्था बनाने पर रहा है। देहात में आरटीपीसीआर जांच कराना अब भी टेढ़ी खीर है। वहीं दादरी के सामुदायिक चिकित्सा केंद्र के प्रभारी डॉ. संजीव सारस्वत का कहना है कि शिविर में जितने भी लोग संक्रमित मिलते हैं उनका पूरा ख्याल रखा जाता है। उन्हें किट प्रदान करने के साथ इलाज की पूरी जानकारी दी जाती है।