जेवर। नोएडा एयरपोर्ट के दूसरे चरण के लिए अधिगृहीत की जाने वाली जमीन के लिए किसानों ने चार गुना मुआवजा मांगा है। किसानों ने कहा है कि बगैर इसके वह जमीन देने के लिए सहमति नहीं देंगे। रविवार को जेवर के रन्हेरा में आयोजित 6 गांवाें के किसानों की पंचायत में इसका फैसला लिया गया। दूसरे फेज के लिए जेवर के 6 गांव की 1185 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण की जानी है।
रविवार को हुई पंचायत में प्रशासन की सहमति बैठकों में भी भाग नहीं लेेने की घोषणा की गई। किसानों ने स्पष्ट किया कि सहमति से पहले प्रशासन को जमीन और घरों के मुआवजे के अलावा नौकरी और किसान व उनके परिवारों को मिलने वाली सभी सुविधाओं की लिखित जानकारी देनी होगी। जिससे संतुष्ट होने के बाद जमीन देने के लिए सहमति देने पर विचार करेंगे।
एयरपोर्ट के विस्तारीकरण के लिए अधिग्रहित की जाने वाली 1365 हेक्टेयर जमीन में से 1185 हेक्टेयर जमीन जेवर के रन्हेरा, मुढरैह, बीरमपुर, कुरैब, दयान्तपुर व नगला करौली सहित छह गांव के किसानों से अधिगृहीत की जानी है। जिसके लिए शासन ने 22 दिसंबर को सामाजिक समाघात निधार्रण रिपोर्ट पर मुहर लगाते हुए इन गांव की जमीन के अधिग्रहण को हरी झंडी दी थी। जिसके बाद प्रशासन ने इन गांव के किसानों से जमीन अधिग्रहण से पहले आवश्यक 70 प्रतिशत सहमति लेने के लिए 7 से 10 जनवरी तक गांव-गांव किसानों के साथ बैठक कर सहमति लेने का प्लान तैयार किया है।
रविवार को इन छह गांव के प्रभावित किसानों के समूह की एक पंचायत जेवर के रन्हेरा गांव में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता अमरपाल सिंह ने की व संचालन अजय प्रताप सिंह ने किया। पंचायत में कृष्ण कुमार शर्मा, विजयपाल सिंह, कालीचरण शर्मा, रामपाल सिंह, जयभगवान सिंह, जितेंद्र फौजी, संजीव, हरकेश छौंकर, महेेश सिंह, महरूद्धीन, होशियार सिंह, इन्द्रवीर सिंह, नेपाल सिंह, यासीन आदि सैंकडों किसान मौजूद रहे।
विस्थापन का स्थान ग्रामीणों की सहमति से तय किया जायेगा
किसानों ने कहां पहले चरण में विस्थापित गांव के लिए जेवर बांगर में आधी अधूरी सुविधाओं के साथ टाउनशिप बनाकर गांव की आबादी को तोड़ कर विस्थापित कर दिया गया जिसमें आज भी किसान परेशान हैं। दूसरे चरण के लिए विस्थापित होने वाले ग्रामीणों के लिए पहले उनकी सहमति के आधार पर विस्थापन की जगह को चिह्नित किया जाए।