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Noida News: पत्नी की सास-ससुर के प्रति उदासीनता क्रूरता की श्रेणी में- हाईकोर्ट

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नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि संयुक्त हिंदू परिवार में माता-पिता अभिन्न अंग होते हैं और पत्नी का उनके प्रति उदासीनता क्रूरता की श्रेणी में आती है। कोर्ट ने पत्नी की सास की बीमारी और हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी की जानकारी न होने को भी उदासीनता का प्रमाण माना।
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न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने यह टिप्पणी एक वैवाहिक अपील को खारिज करते हुए की। कोर्ट ने परिवार न्यायालय के तलाक देने के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा, विवाह में प्रवेश करने पर पति-पत्नी से यह स्वाभाविक अपेक्षा होती है कि वह घर के बुजुर्गों के स्वास्थ्य और सम्मान की देखभाल करेंगे। अपीलकर्ता (पत्नी) द्वारा सास-ससुर के प्रति दिखाई गई उदासीनता और संवेदनशीलता की कमी को मामूली नहीं माना जा सकता। यह व्यवहार प्रतिवादी (पति) और उसके परिवार पर अनावश्यक पीड़ा पहुंचाता है, जो विवाह कानून के दायरे में क्रूरता का एक रूप है। दंपती का विवाह मार्च 1990 में हुआ था और 1997 में एक पुत्र का जन्म हुआ। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी संयुक्त परिवार में रहने को तैयार नहीं थी, बिना अनुमति घर छोड़कर चली जाती थी और 2008 से दांपत्य संबंधों से दूर रही। ब्यूरो
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