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‘कहां बेचा गया सेना के जवानों के नाम पर लिया निवेशकों का खून’

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‘कहां बेचा गया सेना के जवानों के नाम पर लिया निवेशकों का खून’
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ग्रेटर नोएडा (जेपी शर्मा)। बाइक बोट फर्जीवाड़े के आरोपियों ने सेना को देने के नाम पर निवेशकों से रक्तदान कराकर 62100 यूनिट रक्त एकत्रित किया था। बाद में निवेशकों ने एकत्रित रक्त की कालाबाजारी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। ‘अमर उजाला’ ने इस गंभीर मामले का समाचार 27 नवंबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस मामले की पड़ताल के लिए निवेशकों ने आरटीआई के तहत 28 फरवरी 2020 को जिलाधिकारी कार्यालय में पत्र दिया था। वहां से पत्र को जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सीएमओ कार्यालय भेज दिया गया। सीएमओ कार्यालय से नौ माह बाद भी निवेशकों को कोई जवाब नहीं मिला है। अब निवेशक खून की कालाबाजारी व विदेश में बेचे जाने की आशंका जता रहे हैं। पूरे मामले की जांच के लिए सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे और गृह मंत्रालय को पत्र लिखने का फैसला किया है।
दरअसल, दादरी के कोट गांव स्थित बाइक बोट के मुख्य दफ्तर पर 10 दिसंबर 2018 को रक्तदान शिविर लगाया गया था। शिविर लगाने से पहले फर्जीवाड़े के आरोपियों ने सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से अधिक से अधिक निवेशकों को आमंत्रित किया था। उन्हें बताया गया था कि एकत्रित रक्त भारतीय सेना को भेजा जाएगा। जिससे घायल होने वाले सैनिकों की जान बचाने में मदद की जा सके। आरोपियों ने कंपनी में लगाई जाने वाली बाइक की कीमत 62100 जितने यूनिट ही रक्त दान का रिकॉर्ड बनाने की घोषणा की थी। निवेशकों ने आशंका जताई है कि एकत्रित रक्त विदेश में बेचा गया है। अब वह जानना चाहते हैं कि आखिर सेना के जवानों के नाम पर लिया गया निवेशकों का खून कहां बेचा गया है।
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हजारों जवानों से ठगी की भी देंगे जानकारी
कोट गांव स्थित दफ्तर पर 19 माह से धरना दे रहे मुन्ना बालियान ने बताया कि रक्तदान शिविर प्रशासन की मर्जी के बिना नहीं लगाया जाता। इसलिए उन्होंने गौतमबुद्ध नगर जिला प्रशासन से शिविर के संबंध में जानकारी मांगी थी। वहां से उनके पत्र को सीएमओ कार्यालय भेज दिया गया। सीएमओ कार्यालय से भी कोई जवाब नहीं मिला है। अब निवेशक गृह मंत्रालय और सेना प्रमुख को पत्र लिख रहे हैं। पत्र के जरिए उन्हें देश के हजारों सैनिकों से की गई ठगी से भी अवगत कराया जाएगा।
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