अल्जाइमर डे पर विशेष (21 सितंबर)
-जिला अस्पताल में हर महीने आ रहे पांच-छह अल्जाइमर के मरीज
-अत्यधिक तनाव व दबाव के शिकार युवा भी आ रहे चपेट में
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सेक्टर-22 में रहने वाली 70 वर्षीय विमला संचान अब अपने एक साल के पोते को पहचान नहीं पातीं, जबकि उन्हें अपने बच्चों के बचपन की ही नहीं, बल्कि अपने बचपन की बातें भी अच्छी तरह याद हैं। शुरुआत में परिजनों को यह सब महज एक नाटक लगा, लेकिन जब स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो वे उन्हें जिला अस्पताल लेकर गए। जांच के बाद पता चला कि विमला अल्जाइमर से पीड़ित हैं।
यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि जिला अस्पताल में हर महीने 5 से 6 नए अल्जाइमर मरीज सामने आ रहे हैं। कई लोग शुरूआत में इसको सामान्य मानकर अनदेखा कर दे रहे हैं। जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ स्वाति त्यागी बताती हैं कि अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति को बहुत पुरानी बातें तो याद रहती हैं, लेकिन वे नई चीजें बार-बार भूल जाते हैं जैसे कोई नाम, चेहरा, तारीख या हालिया घटना। शुरुआत में रोगी छोटी-छोटी चीजें भूलता है, लेकिन समय के साथ यह समस्या गंभीर हो सकती है।
कई काम करने की आदत स्मृति पर डाल रही प्रभाव
मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजी विभाग के सीनियर डॉयरेक्टर डॉ अमित श्रीवास्तव कहते हैं कि अल्जाइमर आमतौर पर 60 से 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोगों को प्रभावित करता है। युवा लोगों को वास्तविक अल्जाइमर नहीं होता। हालांकि युवा पीढ़ी में स्मृति संबंधी समस्याएं बढ़ रही है, जो तनाव, जीवनशैली, एक साथ कई काम करने, अवसाद और चिंता के कारण हो सकती हैं।
सामूहिक सहयोग बन सकता है प्रभावी दवा
फोर्टिस अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ ज्योति बाला शर्मा बताती हैं कि अल्जाइमर रोग धीरे-धीरे स्मृति, सोच और व्यवहार को प्रभावित करता है और रोगी को उसकी दिनचर्या और आत्मपहचान से दूर कर देता है। इसके शुरुआती संकेतों को समय पर पहचानना बहुत जरूरी है। अल्जाइमर कोई अंत नहीं है, बल्कि एक ऐसी अवस्था है जिसमें संवेदनशीलता, करुणा और सामूहिक सहयोग सबसे प्रभावी दवा बन जाते हैं।
-
अच्छी नींद, अच्छा भोजन और व्यायाम जरूरी
कैलाश हॉस्पिटल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ अनिरुद्ध आर देशमुख बताते हैं कि अल्जाइमर का फिलहाल कोई पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं है, लेकिन जीवनशैली में बदलाव और सही देखभाल से इसकी प्रगति को धीमा किया जा सकता है। दिमाग को ठीक रखने के लिए पौष्टिक खाना खाना चाहिए। रोजाना एक्सरसाइज करनी चाहिए। अच्छी नींद लेनी चाहिए और दिमाग को व्यस्त रखना चाहिए।
-
अल्जाइमर के कुछ प्रमुख कारक
-उम्र बढ़ने के साथ जोखिम बढ़ता है, खासकर 65 साल के बाद।
-आनुवंशिकता यानी परिवार में किसी को बीमारी होने से जोखिम बढ़ सकता है।
- अस्वस्थ आहार, व्यायाम की कमी, धूम्रपान और उच्च रक्तचाप।
- मस्तिष्क में बदलाव यानी अमाइलॉइड प्लेक्स और टाउ प्रोटीन का असामान्य जमाव मस्तिष्क कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
जोखिम को कम करने के लिए कुछ उपाय
- सक्रिय जीवनशैली, नियमित व्यायाम करें, मानसिक गतिविधियां बढ़ाएं।
- संतुलित भोजन लें, ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ खाएं।
- सामाजिक संपर्क बनाए रखें, मानसिक रूप से सक्रिय रहें।
- रक्तचाप, मधुमेह, और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें।
- पहेलियां, पढ़ाई और नए कौशल सीखना मस्तिष्क को सक्रिय रखता है।