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नहीं मिली व्हीलचेयर, बुजुर्गों-दिव्यांगों को गोद में उठाकर पहुंचे परिजन

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ग्रेटर नोएडा/बिलासपुर। बुजुर्गों और दिव्यांगों से घर पर ही मतदान कराने की योजना में प्रशासन असफल हो गया। वहीं मतदान केंद्रों पर व्हीलचेयर की सुविधा का दम भर गया। कुछ केंद्रों पर ऐसा नजारा दिखा कि दिव्यांगों और बुजुर्गों को परिवार के लोग गोद में उठाकर ले गए। वहीं, कई स्थानों पर सुरक्षाकर्मी भी बुजुर्गों की मदद करते दिखाई दिए।
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जिला निर्वाचन आयोग की ओर से 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए घर पर ही बैलेट पेपर के माध्यम से मतदान कराने की योजना चलाई गई थी। अब प्रशासन की लापरवाही हो या बुजुर्ग और दिव्यांगों के परिवार की कम जागरूकता कि मतदान दिवस से पहले बहुत से लोगों के वोट नहीं डल पाए। ऐसे में बृहस्पतिवार को मतदान के दिन बुजुर्गों और दिव्यांगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। दादरी के मिहिर भोज में इंटर कॉलेज में बुजुर्ग महिला वकीला को गोद में लेकर उनका बेटे अमन खान वोट डलवाने पहुंचा। इसी केंद्र में बुजुर्ग महिला भौंता (75 वर्ष) भी वोट डालने पैदल पहुंचीं। वहीं, दनकौर में बाबा गजेंद्र को गोद में उठाकर उनका पोता ईशू वोट डलवाने पहुंचा। कासना स्थित अमीचंद बुजुर्ग शिवकुमार (85), पत्नी रज्जो (80), दिव्यांग वीरवती निवासी मढैया को गोद में उठाकर उनके परिजनों ने वोट डलवाया। चूहड़पुर गांव में दिव्यांग अजमत भी बिना व्हीलचेयर के वोट डालने पहुंचे।
वोट डालने में बाधा नहीं बनी उम्र
बिलासपुर के सरकपुर गांव की 102 वर्ष की समौती देवी ने परिजनों के साथ आकर वोट डाला। इस दौरान वह स्वयं चलकर आईं और वोट दिया। इसके अलावा बुजुर्ग लक्ष्मी नारायण (86) ने भी वोट डाला। वहीं, अल्फा-2 निवासी देवेंद्र सिंह ने भी सेंट जोसेफ में आकर वोट डाला।
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