पानीपत। यमुना मैली हो रही है। शहर के नालों और सीवर से कारखानों का केमिकल युक्त पानी यमुना में पहुंच रहा है। शहर और इससे बाहर करीब सौ स्थानों पर दूषित पानी सीधे ड्रेन नंबर-एक और दो में डाला जा रहा है। प्रशासन के रिकॉर्ड में ही इनकी संख्या 73 तक है। उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैठक के दो दिन बाद भी इनको बंद करने की तरफ नगर निगम या दूसरे विभाग ने कोई सक्रियता नहीं दिखाई है। जबकि इन बिंदुओं पर करीब 10 साल से खुले में पानी चल रहा है।
वहीं कुराड़ गांव के आसपास की फैक्टरी का केमिकल युक्त पानी ड्रेन नंबर दो में डाला जा रहा है। यहां दिन ढलते ही रात के अंधरे में ड्रेन में केमिकल युक्त पानी डालने का खेल चलता है। प्रशासन के दावों के बीच इन पर कोई रोक नहीं लग पाई।
ड्रेन नंबर- एक शहर की लाइफ लाइन मानी जाती है। शहर में करीब 10 किलोमीटर से घूमकर सिवाह गांव स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से होकर पानी यमुना में जाता है। सिवाह गांव में एसटीपी की कैपेसिटी करीब 60 एमएलडी है। वहीं दूसरी बाबरपुर गांव के नजदीक से ड्रेन नंबर दो निकलती है। यह रिफाइनरी के नजदीक से शुरू होती है और शहर के आउटर से होकर खोजकीपुर गांव के नजदीक यमुना में मिलती है।
खुले में पड़ रहा नालों व सीवर का पानी
ड्रेन नंबर-एक में शहर में जगह-जगह सीवर व नाले का पानी सीधे डाला जा रहा है। यहां किसी प्रकार की जाली या फिर अन्य रुकावट नहीं लगाई गई है। काबड़ी रोड से ड्रेन में खुले में दूषित पानी पड़ना शुरू हो जाता है। देवी मंदिर और उससे आगे कॉलोनियों में हर दस कदम पर नाली का पानी छोड़ा जा रहा है। यहां कई कॉलोनियों में शौचालय का पाइप सीधे ड्रेन में डाला जा रहा है। ऐसे में शहर में जगह-जगह इस तरह से नाले व सीवर डाले जा रहे हैं। अब जीटी रोड की सर्विस लेन चौड़ीकरण के लिए बनाए नाले का सीधा कनेक्शन पीडब्ल्यूडी कार्यालय के नजदीक ड्रेन में कर दिया है।
केमिकल युक्त पानी बड़ी परेशानी
कुराड़ क्षेत्र में करीब 250 फैक्टरी हैं। इनमें से अधिकतर में ईटीपी नहीं लगाया गया है। फैक्टरी में बड़े-बड़े टैंक में दिन का केमिकल युक्त व दूषित पानी जमा कर लिया जाता है। ट्रैक्टर और टैंकर की मदद से रात के समय इनसे पानी निकालकर ड्रेन में छोड़ा जा रहा है। एक फैक्टरी में दो से चार ट्रैक्टर लगे हुए हैं। एक ट्रैक्टर चालक रात के समय 10 से 12 चक्कर लगा देते हैं। पुलिस या राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम रात के समय लगातार विजिलेंस नहीं कर पाती। ट्रैक्टर चालक और फैक्टरी मालिक इसका फायदा उठा रहे हैं।
ड्रेन नंबर-एक और दो में सीधे पानी डालने वाले बिंदुओं को बंद किया जाना है। इसके लिए नगर निगम व संबंधित विभागाध्यक्ष को निर्देश दिए गए हैं। ट्रैक्टर-टैंकर से ड्रेन में केमिकल युक्त पानी छोड़ने वालों पर पुलिस कार्रवाई करेगी।
- डॉ. वीरेंद्र कुमार दहिया, उपायुक्त
ड्रेन नंबर एक में डाला जा रहा कॉलोनी का दूषित पानी। संवाद