गांवों के जोहड़ों में पानी सूखने से पशुपालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नहर विभाग की ओर से भी सूखे जोहड़ों में पानी नहीं भरा गया है। ग्रामीणों ने शनिवार को जिला प्रशासन को पत्र भेजकर गांवों के सभी जोहड़ों को भरवाने की मांग की है।
ग्रामीणों के मुताबिक जमीन में घटते जलस्तर व बरसात की कमी के कारण जोहड़ों में पानी सूखने से इसका असर मवेशियों पर भी पड़ने लगा है। कई समय से गांव में मवेशियों के लिए जोहड़ बनाए गए हैं। हर वर्ष इन जोहड़ों में बरसात का पानी एकत्रित होता है जिससे पूरे वर्ष मवेशियों की प्यास बुझ जाती थी। लेकिन क्षेत्र में वर्षा की कमी होने से गांवों के जोहड़ों का पानी सूख चुका है। पानी सूखने से पशुपालकों के सामने पशुओं के लिए पेयजल संकट पैदा हो गया है।
रावली गांव के सलेमी नम्बरदार, हनीफ, ताहिर खेड़ा का कहना है कि बरसात की कमी व घटते जलस्तर से खंड के कई गांवों के जोहड़ों का पानी सूख चुका है। पशुपालकों को पहले ही जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि मवेशियों के पेयजल संकट की समस्या को दूर के लिए ओमप्रकाश चौटाला के आदेश पर वर्ष 2004 में सभी गांवों के जोहड़ों को नहरी पानी से भराया गया था।
अकलिमपुर के हाजी फारुख, अल्ली -मूलथान, चौधरी इल्यास - रसीद-खानपुर घाटी ने कहा कि सरकार की ओर से मवेशियों के पर्याप्त पीने के पानी का प्रबंध जल्दी नहीं किया गया तो पशुपालकों को मवेशियों को बेचना पड़ेगा। इस संबंध में एसडीएम रीगन कुमार ने कहा कि सूख चुके जोहड़ों को नहरी पानी से भरने के अलावा कैसे जोहड़ों में पानी पहुँचाया जा सकता है इसके लिए बीडीपीओ को आदेश दिए जा चुके हैं। जल्द ही सभी जोहड़ों में पानी भरवा दिया जाएगा।